Diwangi Shayari
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Diwangi Shayari

    उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है,
    जो गाह गाह जुनूँ इख़्तियार करते रहे

    Faiz Ahmad Faiz
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    कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
    मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है

    Kumar Vishwas
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    मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वही-ए-इलाही है
    मज़हब तो बस मज़हब-ए-दिल है बाक़ी सब गुमराही है

    Majrooh Sultanpuri
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    मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
    इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा

    Ameer Qazalbash
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    भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो
    जिस से बढ़े बेचैनी दिल की ऐसी तसल्ली रहने दो

    Arzoo Lakhnavi
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    बाद-ए-बहार में सब आतिश जुनून की है
    हर साल आवती है गर्मी में फ़स्ल-ए-होली

    Wali Uzlat
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    जाने कितनी कहानियाँ समेटे रहा होगा
    वो जो शख़्स हाल-ए-दिल बायाँ करता भी नहीं

    दर्द कितनी होगी, बेचैनी कितनी होगी
    वो ज़ुबान जो किसी से कुछ कहता ही नहीं

    Ashish Anand
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    मेरी अक्ल-ओ-होश की सब हालतें
    तुमने साँचे में जुनूँ के ढाल दी

    कर लिया था मैंने अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़
    तुमने फिर बाँहें गले में डाल दी

    Jaun Elia
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    करे जो क़ैद जुनूं को वो जाल मत देना
    हो जिसमें होश उसे ऐसा हाल मत देना

    जो मुझसे मिलने का तुमको कभी ख़याल आये
    तो इस ख़याल को तुम कल पे टाल मत देना

    Kashif Adeeb Makanpuri
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    ख़ुदा से तो कभी दुनिया, कभी ख़ुद से लड़ा हूँ मै
    जुनूँ-ए-इश्क़ में मत पूछ, दिल कितनों के तोड़े हैं

    A R Sahil "Aleeg"
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    पहले कहता है जुनूँ उसका गिरेबान पकड़
    फिर मेरा दिल मुझे कहता है इधर कान पकड़

    ऐसी वहशत भी न हो घर के दरो बाम कहें
    कोई आवाज़ ही ले आ कोई मेहमान पकड़

    Azbar Safeer
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    मेरी बेचैनी का आलम मेरी बेचैनी से पूछो
    मेरे चहरे से पूछोगे कहेगा ठीक है सब कुछ

    Aqib khan
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    जीने के और भी जहाँ में बंद-ओ-बस्त थे
    यह और बात थी कि हम बादा'परस्त थे

    तू आ चुका था फिर भी तेरा इंतज़ार था
    हम याद में 'जस्सर' तेरी इस दरजा मस्त थे

    Avtar Singh Jasser
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    खोने का तुझको डर निकले,
    बेचैनी से हम मर निकले,

    साँसों में तब साँसें आईं,
    जब दिल के तुम अंदर निकले

    Divya 'Kumar Sahab'
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    ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से
    फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है

    Khumar Barabankvi
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    इश्क़ का ही सुरूर है साहिल
    उनके चेहरे पे नूर है साहिल

    A R Sahil "Aleeg"
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    जुनून-ए-इश्क़ में ये बेख़ुदी का आलम है
    ख़ुद अपने शहर में अपना मकान भूल गए

    Shadab Shabbiri
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    अंधों की बेचैनी को तुम क्या जानो दुनियावालों
    तुमने तो दोनों आँखों से ख़ूब उजाले देखे हैं

    DEVANSH TIWARI
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    उस के लहजे में हमेशा ही सुरूर है बहुत
    इसलिए तो अपने आप पर ग़ुरूर है बहुत

    उस की आँखों में नज़ारे ही नज़ारे दिखते हैं
    क्यों कि उन में ख़ूबसूरती का नूर है बहुत

    Meem Alif Shaz
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    तल्ख़ बातों से ही मल्बूस न रहती है ज़बाँ
    मीठे अल्फ़ाज़ ज़बानों को क़बा देते हैं

    मैली पोशाक लपेटे वो मलंगों से लोग
    मस्त होने पे ख़ुदा तक भी बना देते हैं

    Abdulla Asif
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