@Devanshtiwari
DEVANSH TIWARI shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in DEVANSH TIWARI's shayari and don't forget to save your favorite ones.
Followers
7
Content
39
Likes
117
मेयार-ए-ज़र्फ़ तो पहचान हमारा
दुश्मन भी लगता है मेहमान हमारा
हम ग़ज़लें कहने वाले लड़के हैं
हर नुक़्ते पर रहता है ध्यान हमारा
वो मुझे पूछते हैं गाँव में क्या रक्खा है
मैं उन्हें कहता हूँ सब मेरे बड़े रहते हैं
उसके दर पर ही बिला शर्त खड़े रहते हैं
जैसे परवाने हों जो लौ से अड़े रहते हैं
उसका दिल दिल नहीं मयख़ाना हो जैसे यारों
चार छह लोग जहाँ यूँ ही पड़े रहते हैं
ग़मों को आस-पास रखना है
हँसी को इस तरह परखना है
ख़ुशी में जौन की ग़ज़ल गाकर
हमें ख़ुद को उदास रखना है
फूल की ख़ुशबू बदन चुराए बैठे हैं
लोग हमारी रोटी खाए बैठे हैं
कौन कहेगा कौन सुनेगा अब मेरी
मसनद पर सब बिके बिकाए बैठे हैं
घोर उदासी देखी है उन चेहरों ने
जिन चेहरों को सदियों तक मुस्काना था
दौड़ रहे थे आगे-पीछे जो साए
तारीकी में उन्हें तो मुर्शिद जाना था
मुझको ऐसे देख रहा हैरानी में
जैसे सूरज देख लिया पेशानी में
मैं भी उसको देख रहा हूँ कुछ ऐसे
जैसे सूरज डूब रहा हो पानी में
एक परिंदे ने जबसे दो प्यारी बातें बोली हैं
दिल में कितने दीप जले हैं आँखों में रंगोली है
इश्क़ में हद से बढ़ सकती है,बेहतर है
सीप में मोती गढ़ सकती है,बेहतर है
ख़ामोशी भी सुन सकती है वो लड़की
मतलब आँखें पढ़ सकती है,बेहतर है
भूल-भुलैया में भी हमको इक-इक रस्ता याद रहा
उन आँखों में जबसे देखा अपना ठिकाना भूल गए
किसी जगह पर कहीं जहाँ में किसी दिवस मैं तुम्हें दिखूँ तो
सुनो न जानाँ पलट न जाना क़रीब आना गले लगाना
सुन रहा हूँ जा रहे हो, ठीक है
दूरियाँ अपना रहे हो, ठीक है
कह रहे थे साथ दोगे उम्र भर
बीच में ही जा रहे हो, ठीक है