ग़मों को आस-पास रखना है
हँसी को इस तरह परखना है
ख़ुशी में जौन की ग़ज़ल गाकर
हमें ख़ुद को उदास रखना है
घोर उदासी देखी है उन चेहरों ने
जिन चेहरों को सदियों तक मुस्काना था
दौड़ रहे थे आगे-पीछे जो साए
तारीकी में उन्हें तो मुर्शिद जाना था
मुझको ऐसे देख रहा हैरानी में
जैसे सूरज देख लिया पेशानी में
मैं भी उसको देख रहा हूँ कुछ ऐसे
जैसे सूरज डूब रहा हो पानी में
सुन रहा हूँ जा रहे हो, ठीक है
दूरियाँ अपना रहे हो, ठीक है
कह रहे थे साथ दोगे उम्र भर
बीच में ही जा रहे हो, ठीक है
अंधों की बेचैनी को तुम क्या जानो दुनियावालों
तुमने तो दोनों आँखों से ख़ूब उजाले देखे हैं
आँखों से है समझ न आना
फिर होठों से क्या समझाना
सुख-दुख तो हैं सखा तुम्हारे
सो इनसे अब क्या घबराना
हारा-जीता क्षणिक है प्यारे
गिरना उठना क्या शर्माना