DEVANSH TIWARI

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    ग़मों को आस-पास रखना है
    हँसी को इस तरह परखना है

    ख़ुशी में जौन की ग़ज़ल गाकर
    हमें ख़ुद को उदास रखना है

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    घोर उदासी देखी है उन चेहरों ने
    जिन चेहरों को सदियों तक मुस्काना था

    दौड़ रहे थे आगे-पीछे जो साए
    तारीकी में उन्हें तो मुर्शिद जाना था

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    मुझको ऐसे देख रहा हैरानी में
    जैसे सूरज देख लिया पेशानी में

    मैं भी उसको देख रहा हूँ कुछ ऐसे
    जैसे सूरज डूब रहा हो पानी में

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    सुन रहा हूँ जा रहे हो, ठीक है
    दूरियाँ अपना रहे हो, ठीक है

    कह रहे थे साथ दोगे उम्र भर
    बीच में ही जा रहे हो, ठीक है

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    अंधों की बेचैनी को तुम क्या जानो दुनियावालों
    तुमने तो दोनों आँखों से ख़ूब उजाले देखे हैं

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    जिस लड़की की ख़ातिर मैं पागल हो बैठा
    वो लड़की भी अब मुझको पागल कहती है

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    आँखों से है समझ न आना
    फिर होठों से क्या समझाना

    सुख-दुख तो हैं सखा तुम्हारे
    सो इनसे अब क्या घबराना

    हारा-जीता क्षणिक है प्यारे
    गिरना उठना क्या शर्माना

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    सबको इश्क़ सिखाने वाली लड़की सुन
    पहले इश्क़ निभाना पड़ता है लड़की

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    सूखी धरती पर जैसे नीलोफ़र खिल आए हों,
    ऐसा ही लगता है जब हम उनसे मिल आए हों

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    उसकी मर्ज़ी उसका सब है
    हम ना करते करता रब है

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