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A R Sahil "Alig" shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in A R Sahil "Alig"'s shayari and don't forget to save your favorite ones.
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एक दूजे में ऐसी अनबन है
जैसे पत्थर के आगे दर्पन है
किस से उम्मीद अम्न की रक्खे
आदमी आदमी का दुश्मन है
ख़्वाब में ही सही इबादत हो
आपके दर की बस ज़ियारत हो
ग़ैर को क्यों करे भला सज्दा
वो जिसे आपसे मुहब्बत हो
वो गिरफ़्तार जो करे तो फिर
गेसुओं के क़फ़स में मर जाए
ये तमन्ना है एक आशिक़ की
इश्क़ की दस्तरस में मर जाए
निकलने को न जाने दिल से जाँ क्या क्या नहीं निकला
नहीं निकला तो बस इक इश्क़ और शहर-ए-मुज़फ़्फ़रपुर
हम ने देखा है हुस्न का दरिया
रोज़ सौ कश्तियाँ डुबोता है
जिस को मिल जाए इश्क़ में 'साहिल'
सच में वो ख़ुश-नसीब होता है
कहाँ कितना हुआ बर्बाद मैं इश्क़-ओ-मोहब्बत में
मैं माज़ी के झरोखों से ये जा कर देख लेता हूँ
क़फ़स से इश्क़ है जिन को अलग वो रह नहीं सकते
मगर फिर भी परिंदों को उड़ा कर देख लेता हूँ
सभी के वास्ते मुमकिन नहीं है इश्क़ में यह
वो दिल जलाए जिसे दिल जलाना आता है
हमें मालूम था इस इश्क़ में ऐसा ही होता है
किसी पर जाँ छिड़कते हैं किसी से दिल लगाते हैं
जो ज़ाए हो गए सो हो गए उन पर गिरा दो ख़ाक
मगर अब इश्क़ में कोई भी आँसू मत गिरा देना
कोई बस्ती कोई जज़ीरा नहीं
इश्क़ का ख़ूब ही नज़ारा है
साहिल-ए-इश्क़ पर हुआ मालूम
इश्क़ की नाव बेसहारा है
मुझ पर ये ज़ुल्म-ए-हुस्न कोई कम नहीं यहाँ
बोसे की ख़्वाहिशात शिकायत के साथ साथ
इस आशिक़ी ने मुझ को सुख़न-वर बना दिया
मैं शेर कह रहा हूँ मुहब्बत के साथ साथ