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मरीज़-ए- इश्क़ से उस का हाल मत पूछा करो तुम
तबस्सुम लब-कुशा लहजा, झूठ होगा ठीक ही हूँ
तबस्सुम लब-कुशा लहजा, झूठ होगा ठीक ही हूँ
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इश्क़ इकलौती वो मज़हब है जिस के उम्मती यहाँ
बे-वफ़ा की भी इबादत करते है ता-दम-ए-पसीं
बे-वफ़ा की भी इबादत करते है ता-दम-ए-पसीं
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