Faiz Ahmad Faiz

Faiz Ahmad Faiz

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Faiz Ahmad Faiz shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Faiz Ahmad Faiz's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे
बोल ज़बाँ अब तक तेरी है

Faiz Ahmad Faiz

तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए
यूँ न था मैंने फ़क़त चाहा था यूँ हो जाए

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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही

Faiz Ahmad Faiz
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जानता है कि वो न आएँगे
फिर भी मसरूफ़-ए-इंतिज़ार है दिल

Faiz Ahmad Faiz
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दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया
तुझ से भी दिल-फ़रेब हैं ग़म रोज़गार के

Faiz Ahmad Faiz
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यूँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उनकी रस्म नई है, न अपनी रीत नई

यूँ ही हमेशा खिलाए हैं हमने आग में फूल
न उनकी हार नई है, न अपनी जीत नई

Faiz Ahmad Faiz
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रात यूँ दिल में तिरी खोई हुई याद आई
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए

Faiz Ahmad Faiz
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'फ़ैज़' थी राह सर-ब-सर मंज़िल
हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए

Faiz Ahmad Faiz
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शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई
दिल था कि फिर बहल गया जाँ थी कि फिर सँभल गई

Faiz Ahmad Faiz
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फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमएँ जलीं फिर तसव्वुर ने लिया उस बज़्म में जाने का नाम

Faiz Ahmad Faiz
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हम मेहनतकश इस दुनिया से जब अपना हिस्सा मांगेंगे
इक बाग़ नहीं, इक खेत नहीं, हम सारी दुनिया मांगेगे

Faiz Ahmad Faiz
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अब अपना इख़्तियार है चाहे जहाँ चलें
रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम

Faiz Ahmad Faiz
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लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजे

Faiz Ahmad Faiz
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है

Faiz Ahmad Faiz
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मगर गुज़ारनेवालों के दिन गुज़रते हैं
तेरे फ़िराक़ में यूँ सुबह-ओ-शाम करते हैं

Faiz Ahmad Faiz
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उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है,
जो गाह गाह जुनूँ इख़्तियार करते रहे

Faiz Ahmad Faiz
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क़फस उदास है यारों सबा से कुछ तो कहो
कहीं तो बहरे-खुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले

Faiz Ahmad Faiz
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तूने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ
ज़िंदगी जिनके तसव्वुर में लुटा दी हमने

तुझपे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें
तुझको मालूम है क्यों उम्र गंवा दी हमने

Faiz Ahmad Faiz
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कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी

Faiz Ahmad Faiz
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आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
इस के बाद आए जो अज़ाब आए

Faiz Ahmad Faiz
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