Avtar Singh Jasser

Avtar Singh Jasser

@avtarjasser

Avtar Singh Jasser shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Avtar Singh Jasser's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

हम तिरे किरदार तेरे ढंग पे मरते हैं
हैं बहुत कमज़र्फ़ जो भी रंग पे मरते हैं

Avtar Singh Jasser

मेरी क़िस्मत में बरबादियाँ थीं अज़ल से ही लिक्खी हुईं
तुझ से जस्सर करूँ क्या गिला तू फ़क़त इक बहाना हुआ

Avtar Singh Jasser

ये दुनिया इस लिए ही मुझको पागल कह रही है
मेरी कश्ती जो तूफ़ाँ के मुक़ाबिल बह रही है

Avtar Singh Jasser

शाइरी क्या है रदीफ़ ओ क़ाफ़िया क्या च़ीज़ है
आप ही मुझको बताएँ मैं अभी बेबहर हूँ

Avtar Singh Jasser

काश कभी जस्सर ऐसा भी हो जाए
तू मेरे काँधे से लग कर सो जाए

Avtar Singh Jasser

ज़रा नज़दीक आकर सुन मेरी इक बात ऐ उर्दू
मेरी तहरीर बिन तेरे मुक़म्मल हो नहीं सकती

Avtar Singh Jasser

बिछड़ते वक़्त हम रोने लगे थे
मगर फिर भी जुदा होने लगे थे

Avtar Singh Jasser

जनाब आधा अधूरा सा वही क़िस्सा हूँ मैं तो
कई किरदार भी जिसको मुकम्मल कर न पाये

Avtar Singh Jasser

उर्दू ज़बाँ से चाहतों का ये असर हुआ
'जस्सर' सुख़न मेरा हलावतों से तर हुआ

Avtar Singh Jasser

तू मिलेगी ख़्वाब में आ कर मुझे
दिल में रख के यह भरम मैं सो गया

Avtar Singh Jasser

ईद इक पल में हज़ारों बार हो जाए
जब मुझे 'जस्सर' तेरा दीदार हो जाए

Avtar Singh Jasser

किस तरह यह आपकी आँखों में पानी आ गया
याद जस्सर आपको भी कोई यानी आ गया

Avtar Singh Jasser

शहर के रस्ते लगे जब सख़्त अपने पाँव को
हम दिवाने लौट आये फिर से अपने गाँव को

माँ के आँचल का सुकूँ भी याद आया तब हमे
याद जब हमने किया पीपल की ठंडी छाँव को

Avtar Singh Jasser

हमारे इश्क़ का तुम ने गुमांँ ही रख लिया होता
जहाँ औरों को रक्खा है वहाँ ही रख लिया होता

Avtar Singh Jasser

ग़ज़ल को जो गज़ल कहते हैं 'जस्सर'
उन्हें भी लोग शाइर कह रहे हैं

Avtar Singh Jasser

ऐन-मुमकिन है मुझे वो छोड़ जाए
ग़ैर-मुमकिन है मुझे वो भूल पाए

Avtar Singh Jasser

हमेशा के लिए वो भी हमारा हो नहीं सकता
फ़क़त इक इश्क़ हम से भी दोबारा हो नहीं सकता

Avtar Singh Jasser

मुझे उस पे तअज्जुब हो रहा है
जुदा हो कर वो मुझसे रो रहा है

किसी का रफ़्ता-रफ़्ता हो रहा है
मुझे वो रफ़्ता-रफ़्ता खो रहा है

Avtar Singh Jasser

मुझे इतना वो लड़की जानती है
मेरे साए को भी पहचानती है

Avtar Singh Jasser

ख़ुदा क़िस्मत में जो लिख दे वही मिलता है इंसाँ को
मुहब्बत तो किसी को भी किसी का कर नहीं सकती

Avtar Singh Jasser

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