"तेरी मेरी कहानी"
मेरे दिल की तमन्ना ने जब तुम को पुकारा है
यादों ने अजब मौसम मेरे दिल में उतारा है
दर्दों के समुंदर में आहों की रवानी है
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है
सांसों में मेरे दम था बस तेरे ही होने से
सब कुछ मैं गवा बैठा इक तुझको ही खोने से
अब तेरे बिना कैसे सारी उम्र बितानी है ?
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है
तुम्हें टूट के चाहा है, तुम्हें टूट के चाहेंगे
तुम जब भी पुकारोगे हम लौट के आएँगे
दुनिया यह मुहब्बत को जानेगी न जानी है
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है
मुझे चाह थी किसी और की, प मुझे मिला कोई और है
मेरी ज़िन्दगी का है और सच, मेरे ख़्वाब सा कोई और है
तू क़रीब था मेरे जिस्म के, बड़ा दूर था मेरी रूह से
तू मेरे लिए मेरे हमनशीं कोई और था कोई और है
मेरी हालत मेरी सूरत से पहचानी नहीं जाती
किसी सूरत तेरी सूरत से हैरानी नहीं जाती
हुजूम-ए-याद-ए-जानाँ है मेरे पहलू-नशीं 'जस्सर',
मगर फिर भी मेरे इस दिल से वीरानी नहीं जाती |
फिर मिलेंगे आप से गर ज़िंदगी बाक़ी रही
बात यह उस ने जुदा होते हुए मुझ से कही
इस तरह तुझ से किनारा कर लिया मैं ने
और किसी से इश्क़ यारा कर कर लिया मैं ने
है सज़ा जिसकी अभी तक मिल रही मुझको
जुर्म देखो वो दोबारा कर लिया मैं ने
ज़रा नज़दीक आकर सुन मेरी इक बात ऐ उर्दू
मेरी तहरीर बिन तेरे मुकम्मल हो नहीं सकती
ख़ास तो कुछ भी नहीं बदला तुम्हारे बाद में
पहले गुम रहता था तुम में, अब तुम्हारी याद में
मोल हासिल हो गया है मुझको इक-इक शे'र का
सब दिलासे दे रहे हैं मुझको "जस्सर" दाद में
मेरा तो ज़िक्र भी 'जस्सर' तेरे क़िस्से में न आया
तू सब का हो गया लेकिन मेरे हिस्से में न आया