Divya 'Kumar Sahab'

Divya 'Kumar Sahab'

@Kumar_divya

Divya 'Kumar Sahab' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Divya 'Kumar Sahab''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

जगाया है हमें कमबख़्त किसने
बचा था सातवाँ फेरा हमारा

Divya 'Kumar Sahab'

अब जिगर में दर्द है तो दर्द होने दीजिए
आप लड़के को बदल कर मर्द होने दीजिए

Divya 'Kumar Sahab'

लोग यहाँ पर आएँगे तो रंग लगाने मुझको फिर भी
शायद रंगों में लिपटा इक हाथ तुम्हार हो सकता था

दो बच्चों ने मल मल कर जब रंग लगाया इक दूजे को
दोस्त यही लगता है ऐसा साथ हमारा हो सकता था

Divya 'Kumar Sahab'

अच्छा पाने के चक्कर में
अपना सच्चा खो देते हैं

Divya 'Kumar Sahab'

मनेगी इस तरह तुम देखना दीपावली अपनी
कहोगे हाथ छोड़ो भी पकौड़े जल रहे हैं जी

Divya 'Kumar Sahab'

यही वो लोग जब माँगो मदद मुँह फेर लेते हैं
यही वो हैं जो कहते हैं मदद कोई नहीं करता

Divya 'Kumar Sahab'

जिस दिन भूख कचोटेगी तुम तब जानोगे
इक दाने का मतलब क्या क्या हो सकता है

Divya 'Kumar Sahab'

बस मोहब्बत बाँटने का ये असर हम पर हुआ
वो हमीं हैं जो किसी के भी पसंदीदा नहीं

Divya 'Kumar Sahab'

आजकल अपराध झूला हो गया है
इस क़दर क़ानून लूला हो गया है

Divya 'Kumar Sahab'

ज़िंदगी से एक दिन मैंने कहा था प्यार है
ज़िंदगी ने बात मेरी दोस्ती पर रोक दी

Divya 'Kumar Sahab'

प्यार लुटाने पर मेरा मन हर पल बस ये दोहराता है
प्यार लुटाने वाले सारे लोग अकेले रह जाते हैं

Divya 'Kumar Sahab'

मिलाऊँगा उन्हें भी आप सब से सोचता हूँ मैं
मगर कब? जब तलक वो आपकी भाभी नहीं होती

Divya 'Kumar Sahab'

ज़रा सा दुख तो होता है परेशानी नहीं होती
कोई अब छोड़ जाता है तो हैरानी नहीं होती

Divya 'Kumar Sahab'

गोद में मेरी तू अपने सिर को रख कर देखना
सिर को सहलाते हुए तुझको सुनाऊँगा ग़ज़ल

Divya 'Kumar Sahab'

हर जगह बिजली गिरा तूफ़ान ला बरसात कर
लड़ भले दिन रात मुझसे पर मुसलसल बात कर

Divya 'Kumar Sahab'

दोस्त सब देकर गए तोहफ़े में मुझको इक घड़ी
जायज़ा ले जेब का मैं वक़्त देकर आ गया

Divya 'Kumar Sahab'

एक गुब्बारे की क़ीमत अब पता मुझको चली
एक गुम-सुम है खड़ा और एक रोता घर गया

Divya 'Kumar Sahab'

दोस्त देकर के गए तोहफ़े में उनको इक घड़ी
फिर टटोली जेब और मैं वक़्त देकर आ गया

Divya 'Kumar Sahab'

देखो जिनके पैर नहीं हैं वो जुरअत करते हैं
कोई दोनों पैरों से भी लँगड़ा हो सकता है

Divya 'Kumar Sahab'

हाँ आप बच्चे की तरह मुझको मना लेंगे अगर
फिर आप सबके सामने भी डाँट मुझको लीजिये

Divya 'Kumar Sahab'

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