@asifabdullaasif11
Abdulla asif Asif shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Abdulla asif Asif's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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मेरे ख़ुदा ने कहा था मुझसे हरीफ़-ए-जाँ से भी इश्क़ करना
सो बात मानी ख़ुदा की मैंने ख़ुद अपना दीवाना बन गया हूँ
इतना कमज़ोर है मेरा दुश्मन
उस से डरने में शर्म आती है
इतनी आसान हों सज़ाएँ तो
जुर्म करने में शर्म आती है
इब्लीस डर गया मैं तेरे साथ जो हुआ
मेरे भी कुछ सवाल थे अल्लाह के लिए
दरिया किनारे हैं खड़े बेड़े बड़े बड़े
पानी ही पानी बीच में मल्लाह के लिए
देखे दुनिया पंछी का ज़र्फ
सय्यादी निगरान किया है
जितनी है औक़ात तुम्हारी
ऐसों को दरबान किया है
दो चार लोग घर के अगर मेरे छोड़ दो
बाक़ी किसी की आँख में जँचता नहीं हूँ मैं
कब से हूँ मुंतज़िर वो मेरा हाल पूछ लें
और मुस्कुरा के मैं कहूँ अच्छा नहीं हूँ मैं
तेरी तरतीब-ओ-तवाज़ुन में ख़लल मुझसे है दुनिया
तुझको तरतीब में लाऍंगे मिटाते हुए ख़ुदको
मेरा अंदाज़-ए-तफ़व्वुक़ है अनोखा भी अजब भी
देखना चाहूँ मैं मीज़ान पे ढलते हुए ख़ुदको
हमारा साथ ज़रा सोच-वोच कर देना
हमारी किससे अदावत है जानते भी हो
ज़रूरतों में किसी के भी काम आ जाना
अलग तरह की इबादत है जानते भी हो
चल रही हैं नसीब पर बातें
बद-नसीबी से हम हैं मजमे में
आप तो बोलते नहीं थे सच
आप क्या कर रहे हैं पिंजरे में
बे-ख़ता को सता रहे हैं दोस्त
साथ देने में शर्म आती है
मेरे शजरे का मसअला है मियाँ
पाप करने में शर्म आती है
ये ऐसा शेर है जिसको बहुत ही कम सुनाता हूँ
यही वो शेर है हाँ हाँ यही है हो गया है शेर
तेरे कमरे की उदासी की अगर मानूँ तो
तेरे कमरे में मेरे बाद भी आया था कोई
चीख़ चिल्लाके बताता था की मैं हूँ मैं हूँ
न कोई देखता था और न सुनता था कोई