मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के, ज़रा नीची नज़र कर के
ये कहता हूँ अभी तुम से, मोहब्बत हो गई तुम से
शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
हमीं तक रह गया क़िस्सा हमारा
किसी ने ख़त नहीं खोला हमारा
मुआफ़ी और इतनी सी ख़ता पर
सज़ा से काम चल जाता हमारा
इश्क़ का क़िस्सा तू अपनी बेवफ़ाई पर मुकम्मल मत समझना
हश्र के दिन फ़ैसला होगा लहू तर दिल का मेरे, भूलना मत
क़िस्सा तुम्हारा सुन के यही पूछते हैं लोग
उस ने तुम्हारे साथ भी अच्छा नहीं किया
ख़ुदा ने है किया इस इश्क़ को मुश्किल
वही मुश्किल को फिर आसाँ बनाता है
मुहब्बत के सभी क़िस्से बुने उसने
वही दो जिस्म को इक जाँ बनाता है
प्यार मोहब्बत दर्द उदासी सबसे गहरा रिश्ता है
इस दुनिया में यार उदासी का भी गहरा क़िस्सा है
मुक्कमल जिसको समझा था, वो सब क़िस्से अधूरे हैं
न तेरा वार बेहतर था, न मेरे ज़ख़्म पूरे हैं
एक क़िस्सा वफ़ा का सुना दीजिए
दर्दे दिल को ज़रा अब बढ़ा दीजिए
मेरे अल्ला कब तक शब-ए-हिज्र ये
मुझको महबूब से फिर मिला दीजिए
इश्क़ मत करो तुम यूँ कुछ बताना बाक़ी है
अपने दर्द के क़िस्से भी सुनाना बाक़ी है
ज़माना धूप से गुज़रा ज़माना शाम से गुज़रा
हमारे इश्क़ का क़िस्सा हमारे नाम से गुज़रा
सुनी फिर से कहानी जो हमारे दूर जाने की
सुहाना दिन हमारा फिर पुराने जाम से गुज़रा
दिल जिसका मोहब्बत में गिरफ़्तार रहा है
वो मेरी मदद के लिए तैयार रहा है
आग़ाज़-ए-मोहब्बत का फ़साना भी था दिलचस्प
बर्बादी का क़िस्सा भी मज़ेदार रहा है
चीख़कर तारीख़ देती है गवाही देखिए
ये हक़ीक़त है कोई क़िस्सा या अफ़्साना नहीं
बिन्त-ए-हव्वा का शजर माज़ी से लेकर आज तक
इब्न-ए-आदम ने कभी भी मर्तबा जाना नहीं
मोहब्बत से शुरू क़िस्सा हमारा
मोहब्बत के लिए जीना हमारा
तिजारत हम कोई करते नहीं हैं
इसी से चलता है ख़र्चा हमारा
ज़माने भी दुआ देंगे ख़ुदा का शुक्र है बोलो
तिरा अहल ए सुख़न के क़िस्सा ए फ़रियाद में आना