Mohit Dixit

Mohit Dixit

@mohitdixit

Mohit Dixit shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mohit Dixit's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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ये जंग पे जाते हुए जाँबाज़ सिपाही
जब हार के लौटेंगे तो कविताएँ लिखेंगे

Mohit Dixit

दयार-ए-ग़ैर में तुम ख़ुद से ख़ुद में तन्हा हो
जो तुमको चाहते थे अब भी चाहते होंगे

Mohit Dixit

जिन भी आँखों ने तेरा ख़्वाब सजाया होगा
फिर कभी उनको ज़माना नहीं भाया होगा

वो तुझे दोस्त बताते हैं मुझे हैरत है
इन अदाओं पे उन्हें प्यार तो आया होगा

Mohit Dixit

हम ऐसे लोग भी जाने कहाँ से आते हैं
ख़ुशी में रोते हैं जो ग़म में मुस्कुराते हैं

हमारा साथ भला कब तलक निभाते आप
कभी कभी तो हमीं ख़ुद से ऊब जाते हैं

Mohit Dixit

तुम्हारे बाद इस आँगन में फूल खिलने पर
ख़ुशी हुई भी तो ये दुख हुआ कि दें किसको

Mohit Dixit
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मेरे रक़ीब तू उस रोज़ मुझसे जीतेगा
तुझे वो जब ये बता दे कि एक लड़का था

फिर उसके बाद उसे मेरा सच बता देना
अगर वो कहने लगे दिल का नेक लड़का था

Mohit Dixit

मैं उसे देखता आया हूँ कई बरसों से
मेरी आँखों में अभी तक वही हैरत क्यूँ है

उसके मेयार की मुझमें कोई भी बात नहीं
सोचता हूँ कि उसे मुझसे मोहब्बत क्यूँ है

Mohit Dixit

अब मोहब्बत से भागता हूँ मैं
बात ये है कि डर गया हूँ मैं

Mohit Dixit

ज़ेहन-ओ-दिल में मेरे पेच है इक फँसी तुझको जाना है तो जा चला जा अभी
इश्क़ है तुझसे या है महज़ दिल्लगी तुझको जाना है तो जा चला जा अभी

ये तअल्लुक़ भी आसाँ नहीं हम-सफ़र मोड़ आने हैं आएँगे आगे मगर
घर पलटने का ये मोड़ है आख़िरी तुझको जाना है तो जा चला जा अभी

Mohit Dixit

तुझ तक आने का सफ़र इतना भी आसाँ तो न था
तूने फेरी है नज़र हमसे जिस आसानी से

Mohit Dixit

कितने दिन हो गए तुमको देखे हुए
शायद अरसा हुआ हो पता ही नहीं

वक़्त तो रुक गया है घड़ी चलती है
मैं घड़ी की तरफ़ देखता ही नहीं

Mohit Dixit

अपने रंगों उमंगों भरे आस्माँ पर
जैसे बे-रंग बादल कोई छा चुका है

मेरी नम आँखों पर क्यूँ परेशान हो तुम
यार इनमें तो सैलाब तक आ चुका है

Mohit Dixit

इक हुस्न-ए-बे-मिसाल है मेरी निगाह में
देखो उस ओर मेरा इशारा है उस तरफ़

अब नाव अपनी डूबने वाली है साथियों
जो तैर सकते हो तो किनारा है उस तरफ़

Mohit Dixit

उनसे कह दो कहानियाँ न कहें
मैं कहानी में जैसे था ही नहीं

Mohit Dixit

वो लोग मुझसे कह रहे थे आपका दिन अच्छा हो
उन्हें नहीं पता कि मेरी ज़िंदगी ख़राब है

Mohit Dixit

हमने हर शय में तलाशी है कोई और ही शय
और इसी धुन में हमेशा रहे खोए खोए

फिर किसी और के धोखे में किसी को चाहा
फिर किसी और के काँधे पे किसी को रोए

Mohit Dixit

तुम्हें यक़ीन नहीं आएगा लेकिन मैं सच कहता हूँ
मैं ने उस इंसान को देखा भी है और जिया भी है

Mohit Dixit

गईं जो सर्दियाँ दरख़्त सूखने लगे
हवा भी चीखने लगी ये दिन उदास हैं

इन्हीं दिनों की इक सहर जुदा हुए थे हम
इसीलिए तो आज भी ये दिन उदास हैं

Mohit Dixit

आइना क्यूँ ख़रीद कर रक्खें
जब सँवरने का दिल नहीं करता

इश्क़ ही था जो दिल से करते थे
वो भी करने का दिल नहीं करता

Mohit Dixit

हम जो हँसते थे हाल-ए-दुनिया पर
हम को रोना सिखा गया कोई

Mohit Dixit

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