SIDDHARTH SHARMA

SIDDHARTH SHARMA

@Siddharthsharma

SIDDHARTH SHARMA shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in SIDDHARTH SHARMA's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

जब कभी मैं कहता ख़ुद को फ़ुजू़ल है लड़की
डाँट कर माँ कहती सुन एक फूल है लड़की

चूम कर वो आयत बोली लगाओ रामायण
मैं भी जा के मंदिर बोला क़ुबूल है लड़की

SIDDHARTH SHARMA

तेरा होना नहीं भरता जरा भी रौनकें मुझमें
तेरा जाना भी मुझको यार अब तन्हा नहीं करता

ये मेरी है मुहब्बत मैं अकेला कर भी सकता हूँ
तेरा मौजूद होना इसको अब दूना नहीं करता

SIDDHARTH SHARMA

बनाने वालों ने इक बार ढाला छत
मेरी माँ रोज़ उठ कर घर बनाती है

माँ दर्जा ईश्वर का राम को देती
मेरे कान्हा को भी सुंदर बनाती है

SIDDHARTH SHARMA

कल बदल दूँगा घर का कैलेंडर मैं भी
ज़ेहन में पर कुछ तारीख़ें रह जायेगी

SIDDHARTH SHARMA

उसे क्या ही पता होगा इबादत किस को कहते है
मुझे पूछा जो करती थी मोहब्बत किस को कहते है

सभी वादें सभी क़समें सनम निकले महज़ क़िस्से
तसव्वुर से मैं ने सीखा हक़ीक़त किस को कहते है

SIDDHARTH SHARMA
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ख़ुदा कुछ सोच कर तूफाँ बनाता है
दुआएँ दे उसे वो माँ बनाता है

ख़ुशी में वो अता करता है सबको माँ
जो ना-ख़ुश हो तो फिर बिन माँ बनाता है

SIDDHARTH SHARMA

हवाएँ चूम कर तुम ने
चिराग़ों को जलाया है

तेरी आवाज़ दस्तक है
ख़ुदा ने घर बुलाया है

SIDDHARTH SHARMA

ख़ुदा ने है किया इस इश्क़ को मुश्किल
वही मुश्किल को फिर आसाँ बनाता है

मुहब्बत के सभी क़िस्से बुने उसने
वही दो जिस्म को इक जाँ बनाता है

SIDDHARTH SHARMA

मोहब्बत ने सिखाया है
मोहब्बत वक़्त ज़ाया है

मगर ये दिल न जाने क्यों
गुलाबें फिर ले आया है

SIDDHARTH SHARMA

आसमाँ के टूटते तारो से मत मांगो मुरादे
हौसला दो तुम उसे वो झिलमिलाना हारा होगा

SIDDHARTH SHARMA

उसने अब तक वो चूड़ी उतारी नहीं
या'नी खो बैठी है मुझको हारी नहीं

इक दो दो वज़्न है बस मोहब्बत का यार
पूरी दुनिया मगर इस से भारी नहीं

SIDDHARTH SHARMA

पुरानी फ़ोटो उसकी देखता हूँ मैं
नई तस्वीर आँखों को रुलाती है

वो मुझको छोड़ कर ऐसे गयी 'साहिर'
माँ जैसे छोड़ कर बच्चे को जाती है

SIDDHARTH SHARMA

जीता बना दे या हारा बना दे
ऐ माँ मुझे भी सितारा बना दे

दरहम के आलम में न छोड़ मुझको
अपनी नज़र का नज़ारा बना दे

SIDDHARTH SHARMA

दिल के अंदर दुकान होता है
जिसका बाहर मकान होता है

दिल के इक हिस्से में मोहब्बत बस
बाक़ी सब में जहान होता है

SIDDHARTH SHARMA

मिरे दिल मे रहता किताबों का कोना
के लम्हात में गुम हिसाबों का कोना

आ जाओ कभी तुम सवालात बन कर
बचा के रखा है जवाबों का कोना

SIDDHARTH SHARMA

तू मुझको देख तेरे शहर में घर है मोहब्बत का
जो रोता है नहीं उसको मगर तू याद आती है

तू मुझसे डर हाँ सच में डर मैं तेरा नाम ले दूँगा
मोहब्बत है नहीं तो तू ग़ज़ल के बाद आती है

SIDDHARTH SHARMA