@shubham-seth
Shubham Seth shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shubham Seth's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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कभी राहें मैं भूलूँ तो कभी घर भूल जाता हूँ
सिवा तेरे सभी चीजें मैं अक्सर भूल जाता हूँ
अचानक नींद से उठकर कभी भी रोने लगता हूँ
तुझे क्या सच में लगता है मैं सोकर भूल जाता हूँ
आग उगलती रातों में इक शीतलता सी छायी थी
गर्मी की छुट्टी में फिर वो मामा के घर आयी थी
दिन गुजारूंँ आपके बिन ये तो था मुश्किल बहुत
खुद ख़ुशी से मर गया मैं, ख़ुदकुशी आसान थी
बता ज्योतिष तुझे कितने भरूँ पैसे बदलने को
सभी लेकर मुझे वो दे, लकीरों को बदल मेरी
हमारा हाल मत पूछो हमारा हाल अच्छा है
नहीं था ठीक पर कहता रहा बेहाल अच्छा है
मिरा तो कुछ नहीं बिगड़ा इसी कारण नहीं बोला
किसी बस और से मत बोल देना साल अच्छा है
उस घूँघट में इक चेहरा है उस चेहरे पे इक तिल भी है
उस तिल पे हमारी जान फिदा कुरबान उसी पर दिल भी है
वो सतरह आशिक़ क़त्ल हुए इन तेरी फरेबी नज़रों से
इक हद तक तो मासूम तू है पर इक हद तक क़ातिल भी है
उनको दाना पानी मिलता, उनके भी बच्चे सो जाते
कितना अच्छा होता जो सब अपने-अपने घर को जाते
तितली वो ही फूल चुनेगी जिस पर उसका दिल आये
इक लड़की के पीछे इतनी मारामारी ठीक नहीं
ये लो खंजर जितने भी हैं शिक़वे तुम बस खत्म करो
इक गलती पर ताने देना बारी-बारी ठीक नहीं
मुझे इस इश्क़ ने तेरे बड़ा लाचार कर डाला
अजी लाचार क्या पूरी तरह बेकार कर डाला
मिरे हाकिम बड़ा जादू दिखाते हैं क्या देखोगे?
मरे थे चार सौ लेकिन उसे बस चार कर डाला
सभी को लग रहा था खुदकुशी से मर गया था मैं
मगर सच्चाई ये थी, खुद खुशी से मर गया था मैं
लुभाते थे उसे बस आज के शायर सो मैंने भी
पढ़ीं तहजीब की ग़ज़लें करीं अफ़्कार की बातें