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दिल उस की मोहब्बत में परेशान तो होगा
अब आग से खेलोगे तो नुक़सान तो होगा
अब आग से खेलोगे तो नुक़सान तो होगा
वादे पे न आओगे तो तफ़्तीश तो होगी
कानून को तोड़ोगे तो चालान तो होगा
हम ने तो उसे एक अँगूठी भी नहीं दी
वो ताज-महल देख के हैरान तो होगा
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खाने को तो ज़हर भी खाया जा सकता है
लेकिन उस को फिर समझाया जा सकता है
लेकिन उस को फिर समझाया जा सकता है
इस दुनिया में हम जैसे भी रह सकते हैं
इस दलदल पर पाँव जमाया जा सकता है
सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना
पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है
मैं ने कैसे कैसे सद
में झेल लिए हैं
इस का मतलब ज़हर पचाया जा सकता है
इतना इत्मीनान है अब भी उन आँखों में
एक बहाना और बनाया जा सकता है
झूट में शक की कम गुंजाइश हो सकती है
सच को जब चाहो झुठलाया जा सकता है
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