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Khvaab Shayari
उलटे सीधे सपने पाले बैठे हैं
सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं
Shakeel Jamali
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ऐसा है कि सब ख़्वाब मुसलसल नहीं होते
जो आज तो होते हैं मगर कल नहीं होते
Ahmad Faraz
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और तो क्या था बेचने के लिए
अपनी आँखों के ख़्वाब बेचे हैं
Jaun Elia
18
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मेरी नींदें उड़ा रक्खी है तुम ने
ये कैसे ख़्वाब दिखलाती हो जानाँ
किसी दिन देखना मर जाऊँगा मैं
मेरी क़स
में बहुत खाती हो जानाँ
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Subhan Asad
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यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
Nida Fazli
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आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में है अरमाँ क्या क्या
Akhtar Shirani
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माना कि सब के सामने मिलने से है हिजाब
लेकिन वो ख़्वाब में भी न आएँ तो क्या करें
Akhtar Shirani
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जब से हासिल हुआ है वो मुझ को
ख़्वाब आने लगे बिछड़ने के
Siraj Faisal Khan
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जब भी माँगूँ तेरी ख़ुशी माँगूँ
और दुआएँ ख़ुदा तलक जाएँ
ख़्वाब आएँ तो नींद यूँ महके
आँख से ख़ुशबुएँ छलक जाएँ
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Ritesh Rajwada
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कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए
कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए
अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर
हम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए
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Farhat Abbas Shah
11
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बारूद के बदले हाथों में आ जाए किताब तो अच्छा हो
ऐ काश हमारी आँखों का इक्कीसवाँ ख़्वाब तो अच्छा हो
Ghulam Mohammad Qasir
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सुनहरी लड़कियों इनको मिलो मिलो न मिलो
ग़रीब होते हैं बस ख़्वाब देखने के लिए
Abbas Tabish
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हर दिसम्बर इसी वहशत में गुज़ारा कि कहीं
फिर से आँखों में तिरे ख़्वाब न आने लग जाएँ
Rehana Roohi
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अगर मिले कभी फ़ुर्सत तो देख लेना इन्हें
तुम्हारी आँखों में कुछ ख़्वाब छोड़े जाता हूँ
Shajar Abbas
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जो मैं उस के हिस्से में सारा हुआ तो
फिर इक बार वो सब दुबारा हुआ तो
तिरे ख़्वाब तो ऐश ओ आराम के हैं
मिरे साथ जो बस गुज़ारा हुआ तो
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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जब भी कश्ती मिरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है
Munawwar Rana
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है
मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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मिलने का वा'दा उन के तो मुँह से निकल गया
पूछी जगह जो मैं ने कहा हँस के ख़्वाब में
Unknown
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ज़ख़्म उन के लिए मेहमान हुआ करते हैं
मुफ़लिसी जो तेरे दरबान हुआ करते हैं
वो अमीरों के लिए आम सी बातें होंगी
हम ग़रीबों के जो अरमान हुआ करते हैं
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Mujtaba Shahroz
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अपने मरकज़ से अगर दूर निकल जाओगे
ख़्वाब हो जाओगे अफ़्सानों में ढल जाओगे
हम-सफ़र ढूँडो न रहबर का सहारा चाहो
ठोकरें खाओगे तो ख़ुद ही सँभल जाओगे
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Iqbal Azeem
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Khyaal Shayari
Intezaar Shayari
Zindagi Shayari Collection