@subhan-asad
Subhan Asad shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Subhan Asad's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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ये कांटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है
राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं
हम कुछ ऐसे उसके आगे अपनी वफ़ा रख देते हैं
बच्चे जैसे रेल की पटरी पर सिक्का रख देते हैं
तस्वीर-ए-ग़म, दिल के आँसू, रंजो-नदामत, तन्हाई
उसको ख़त लिखते हैं ख़त में हम क्या क्या रख देते हैं
जब भी उस कूचे में जाना पड़ता है
ज़ख्मों पर तेज़ाब लगाना पड़ता है
उसके घर से दूर नहीं है मेरा घर
रस्ते में पर एक ज़माना पड़ता है
जब बुलंदी का गुमाँ था तो नहीं याद आयी
अपनी परवाज़ से टूटे तो ज़मीं याद आयी
वही आँखें कि जो ईमान-शिकन आँखें हैं
उन्हीं आँखों की हमें दावत-ए-दीं याद आयी
उसने पूछा था पहले हाल मेरा
फिर किया देर तक मलाल मेरा
मैं वफ़ा को हुनर समझता था
मुझपे भारी पड़ा कमाल मेरा
ये मेरी ज़िद ही ग़लत थी कि तुझसा बन जाऊँ
मैं अब न अपनी तरह हूँ न तेरे जैसा हूँ
हमारे बीच ज़माने की बदगुमानी है
मैं ज़िंदगी से ज़रा कम ही बात करता हूँ
मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुशबयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, म'आनी सब
मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब
तुम्हें देखे ज़माना हो गया है
नज़र महके ज़माना हो गया है
बिछड़के तुमसे आँखें बुझ गयी हैं
ये दिल धड़के ज़माना हो गया है
कौन देकर गया दुआ दिल को
उम्र भर दर्द ही रहा दिल को
दस्तकें दे रहा है कुछ दिन से
हमसे क्या काम पड़ गया दिल को