Siraj Faisal Khan

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Siraj Faisal Khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Siraj Faisal Khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

आज मेरी इक ग़ज़ल ने उस के होंटों को छुआ
आज पहली बार अपनी शाइ'री अच्छी लगी

Siraj Faisal Khan
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फ़ातिहा पढ़ कि फूल रख मुझ पर
आ गया है तो कुछ जता अफ़सोस

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चलो ये माना मना लोगी ख़ानदान को तुम
मगर बताओ न माने अगर वो फिर जानाँ?

Siraj Faisal Khan
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तुम अपने क़ौल से मुकरोगी तो नहीं जानाँ
हमारे सामने जब ख़ानदान आएंगे

Siraj Faisal Khan
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तुम्हारा हाथ मेरे हाथ से न छूटेगा
न ख़ानदां से डरूँगा न मैं ज़माने से

Siraj Faisal Khan
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तू अपने घर में मुहब्बत की जीत पर ख़ुश है
अभी ठहर के मेरा ख़ानदान बाक़ी है

Siraj Faisal Khan
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इश्क़ मेरी ज़ुबान से निकला
और मैं ख़ानदान से निकला

Siraj Faisal Khan
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बेनतीजा रह गईं दिल्ली में सारी बैठकें
अन्नदाता खेत की मेड़ों पे भूखे मर गए

Siraj Faisal Khan
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जहान वालों से कह दो यहाँ से हट जाएँ
ख़ुदा के और मेरे दरमियाँ से हट जाएँ

Siraj Faisal Khan
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मैं इस ख़याल से शर्मिंदगी में डूब गया
कि मेरे होते हुए वो नदी में डूब गया

Siraj Faisal Khan
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कहीं क़ालीन राहों में बिछे हैं
कहीं पैरों में चप्पल भी नहीं है

Siraj Faisal Khan
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वो उजला हो कि मैला हो या महँगा हो कि सस्ता हो
ये माँ का सर है इस पर हर दुपट्टा मुस्कुराता है

Siraj Faisal Khan
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मैं संग-ए-मील था तो ये करना पड़ा मुझे
ता-उम्र रास्ते में ठहरना पड़ा मुझे

Siraj Faisal Khan
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दश्त जैसी उजाड़ हैं आँखें
इन दरीचों से ख़्वाब क्या झांकें

Siraj Faisal Khan
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उस की यादों की काई पर अब तो
ज़िंदगी-भर मुझे फिसलना है

Siraj Faisal Khan
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ख़याल कब से छुपा के ये मन में रक्खा है
मिरा क़रार तुम्हारे बदन में रक्खा है

Siraj Faisal Khan
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ख़ौफ़ आता है अपने साए से
हिज्र के किस मक़ाम पर हूँ मैं

Siraj Faisal Khan
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ज़मीं मेरे सज्दे से थर्रा गई
मुझे आसमाँ से पुकारा गया

Siraj Faisal Khan
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उस के दिल की आग ठंडी पड़ गई
मुझ को शोहरत मिल गई इल्ज़ाम से

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दिल की दीवार पर सिवा उस के
रंग दूजा कोई चढ़ा ही नहीं

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