ज़ख़्म उन के लिए मेहमान हुआ करते हैंमुफ़लिसी जो तेरे दरबान हुआ करते हैंवो अमीरों के लिए आम सी बातें होंगीहम ग़रीबों के जो अरमान हुआ करते हैं— Mujtaba Shahroz