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वो रुख़्सत की घड़ी वो दीदा-ए-नम याद आते हैं
न जाने आज क्यूँ भूले हुए ग़म याद आते हैं
न जाने आज क्यूँ भूले हुए ग़म याद आते हैं
ये चश्म-ए-दोस्त की साज़िश नहीं तो और फिर क्या है
कि मेरे मुंदमिल ज़ख़्मों के मरहम याद आते हैं
हुआ है जब से दिल सैद-ए-सितम-हा-ए-ग़म-ए-दौराँ
वो याद आते तो हैं लेकिन बहुत कम याद आते हैं
यहाँ हम ग़म ग़लत करने को आए थे मगर साक़ी
क़यामत है कि मयख़ाने में भी ग़म याद आते हैं
कोई जब छेड़ता है क़िस्सा-ए-दार-ओ-रसन 'क़ैसर'
तो दीवानों को उन की ज़ुल्फ़ के ख़म याद आता है
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जब तिरी यादों की पुर्वाई ग़ज़ल गाती है
फूल खिल उठते हैं तन्हाई ग़ज़ल गाती है
फूल खिल उठते हैं तन्हाई ग़ज़ल गाती है
रक़्स करती हुई आती है तिरे जिस्म की याद
तेरी टूटी हुई अँगड़ाई ग़ज़ल गाती है
गुदगुदाती है तसव्वुर को तिरे रूप की धूप
मेरे जज़्बात की शहनाई ग़ज़ल गाती है
एक मुद्दत हुई इस राह से गुज़रा था कोई
आज तक दिल की ये अँगनाई ग़ज़ल गाती है
नग़्में सरगोशी के लहराते हैं पनघट पनघट
तोहमतें हँसती हैं रुस्वाई ग़ज़ल गाती है
झूम झूम उठता है साक़ी तिरे 'क़ैसर' का ख़याल
जब तिरी आँखों की गहराई ग़ज़ल गाती है
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इक भीड़ है जल्वों की और मेरी नज़र तन्हा
है आइना-ख़ाने में ख़ुद आइना-गर तन्हा
है आइना-ख़ाने में ख़ुद आइना-गर तन्हा
उन पाँव के छालों से पूछो ये बताएँगे
तय कैसे किया हम ने शो'लों का सफ़र तन्हा
जलते हुए मौसम में इस तरह वो हँसता है
सहरा में हँसे जैसे कोई गुल-ए-तर तन्हा
क्या जानिए क्यूँ मुझ पर ये ख़ास इनायत है
क्या जानिए जलता है क्यूँ मेरा ही घर तन्हा
इक शोर-ए-क़यामत है और भीड़ है चेहरों की
इस दौर में रहता है हर शख़्स मगर तन्हा
तन्हाई का ग़म तुम को उस वक़्त मज़ा देगा
मेरी ही तरह तुम भी हो जाओ अगर तन्हा
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फ़ज़ाओं से गुज़रता जा रहा हूँ
ख़लाओं में बिखरता जा रहा हूँ
ख़लाओं में बिखरता जा रहा हूँ
मैं रेगिस्तान में बैठा हूँ लेकिन
समुंदर में उतरता जा रहा हूँ
ज़माना लम्हा लम्हा जी रहा है
मैं लम्हा लम्हा मरता जा रहा हूँ
वो जितने दूर होते जा रहे हैं
मैं उतना ही सँवरता जा रहा हूँ
चला हूँ अपने से दो हात करने
मगर ख़ुद से भी डरता जा रहा हूँ
मैं नुक़्ता बन के इक मरकज़ पे यारो
न जाने क्यूँ ठहरता जा रहा हूँ
मिटाने पर भी मैं उर्दू की मानिंद
सँवरता और निखरता जा रहा हूँ
मैं काली झील में डूबा था ख़ुद ही
मगर ख़ुद ही उभरता जा रहा हूँ
मैं 'क़ैसर' अपनी आँखों से टपक कर
किसी दिल में उतरता जा रहा हूँ
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