जला कर दिल उजाला हो गया क्या
मेरा ज़र्रा सितारा हो गया क्या
मेरा ज़र्रा सितारा हो गया क्या
नई चीज़ों को घर में रखने वाले
मैं कुछ ज़्यादा पुराना हो गया क्या
घरों से भागने वाले बताएँ
मोहब्बत से गुज़ारा हो गया क्या
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छोड़ कर जाने का दस्तूर नहीं होता था
कोई भी ज़ख़्म हो नासूर नहीं होता था
कोई भी ज़ख़्म हो नासूर नहीं होता था
मेरे भी होंठ पे सिगरेट नहीं होती थी
उस की भी माँग में सिंदूर नहीं होता था
औरतें प्यार में तब शौक़ नहीं रखती थी
आदमी इश्क़ में मज़दूर नहीं होता था
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जहाँ-जहाँ पे तुझे ग़ैर ने छुआ हुआ था
वहाँ-वहाँ पे मेरा जिस्म भी जला हुआ था
वहाँ-वहाँ पे मेरा जिस्म भी जला हुआ था
शिकस्त होनी थी ये मेरा पहला इश्क़ था और
वो बे-वफ़ा यही करते हुए बड़ा हुआ था
फिर एक रोज़ मुझे ये पता लगा उस के
पुराने आशिक़ों के साथ भी बुरा हुआ था
पिता के कहने से लड़की ने घर बसा लिया पर
माॅं इस कहानी में लड़के के साथ क्या हुआ था
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या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ
गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ
गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ
वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है
वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ
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