Danish Naqvi

Top 10 of Danish Naqvi

    मुसीबतें सर-बरहना होंगी अक़ीदतें बे-लिबास होंगी
    थके हुओं को कहाँ पता था कि सुब्हें यूँ बद-हवास होंगी

    तू देख लेना हमारे बच्चों के बाल जल्दी सफ़ेद होंगे
    हमारी छोड़ी हुई उदासी से सात नस्लें उदास होंगी

    कहीं मिलें तुम को भूरी रंगत की गहरी आँखें मुझे बताना
    मैं जानता हूँ कि ऐसी आँखें बहुत अज़िय्यत-शनास होंगी

    मैं सर्दियों की ठिठुरती शामों के सर्द लम्हों में सोचता हूँ
    वो सुर्ख़ हाथों की गर्म पोरें न-जाने अब किस को रास होंगी

    ये जिस की बेटी के सर की चादर कई जगह से फटी हुई है
    तुम उस के गाँव में जा के देखो तो आधी फ़स्लें कपास होंगी

    Danish Naqvi
    3 Likes

    मुश्किल दिन भी आये लेकिन फ़र्क न आया यारी में
    हमने पूरी जान लगाई उसकी ताबेदारी में

    बेईमानी करते तो फिर शायद जीत के आ जाते
    चाहे हार के वापिस आये खेले अपनी बारी में

    मीठे मीठे होंठ हिलाये कड़वी कड़वी बातें की
    कीकर और गुलाब लगाया उसने एक क्यारी में

    तेरी जानिब उठने वाली आँखों का रुख़ मोड़ लिया
    हमने अपने ऐब दिखाए तेरी पर्दादारी में

    जाने अब वो किसके साथ निकलता होगा रातों को
    जाने कौन लगाता होगा दो घंटे तैयारी में

    Danish Naqvi
    9 Likes

    सब लोग कहानी में ही मशरूफ़ रहे थे
    दरअस्ल अदाकार हक़ीक़त में मरे थे

    जाते हुए कमरे की किसी चीज़ को छू दे
    मैं याद करूँगा कि तेरे हाथ लगे थे

    आँखे भी तेरी फतह न कर पाये अभी तक
    किस लम्हा ए बेकार में हम लोग बने थे

    मैंने तो कहा था निकल जाते है दोनों
    उस वक़्त कहानी में सभी लोग नए थे

    Danish Naqvi
    6 Likes

    माहौल मुनासिब हो तो ऊपर नहीं जाते
    हम ताज़ा घुटन छोड़ के छत पर नहीं जाते

    देखो मुझे अब मेरी जगह से न हिलाना
    फिर तुम मुझे तरतीब से रख कर नहीं जाते

    बदनाम हैं सदियों से ही काँटों की वजह से
    आदत से मगर आज भी कीकर नहीं जाते

    जिस दिन से शिकारी ने अदा की कोई मन्नत
    दरबार पे उस दिन से कबूतर नहीं जाते

    सो तुम मुझे हैरत-ज़दा आँखों से न देखो
    कुछ लोग सँभल जाते हैं सब मर नहीं जाते

    Danish Naqvi
    9 Likes

    तसल्ली कर के ही आवाज़ देना
    जिसे भी आख़री आवाज़ देना

    इसी लहजे की फरमाइश है मेरी
    मुझे बिल्कुल यही आवाज़ देना

    तुम्हारी सम्त है सारी तवज़्ज़ोह
    अग़र चाहो कभी आवाज़ देना

    मुकर जाते हो फिर तुम पूछने पर
    बुलाना हो तभी आवाज़ देना

    ये आवाज़ों का फीकापन तो जाये
    ज़रा रस घोलती आवाज़ देना

    हमारा हक़ भी है तुम पर यक़ीनन
    हमें भी ज़िन्दगी आवाज़ देना

    Danish Naqvi
    2 Likes

    आवाज़ की दूरी पे खड़ा सोच रहा हूँ
    अब कौन मुझे देगा सदा सोच रहा हूँ

    छोटी सी नज़र आती है अतराफ़ की हर शय
    इस वक़्त मैं कुछ इतना बड़ा सोच रहा हूँ

    क्या सोचना था मुझ को तिरे बारे में लेकिन
    अफ़्सोस तिरे बारे में क्या सोच रहा हूँ

    तू ने तो मिरे बारे में सोचा भी नहीं है
    मैं फिर भी कोई अच्छा बुरा सोच रहा हूँ

    जिस दिन से उठीं मुझ पे तिरी सब्ज़ सी आँखें
    मैं पेड़ नहीं फिर भी हरा सोच रहा हूँ

    नुक़सान बहुत से थे गए साल के 'दानिश'
    लेकिन तिरे बारे में बड़ा सोच रहा हूँ

    Danish Naqvi
    3 Likes

    तो देख लेना हमारे बच्चों के बाल जल्दी सफ़ेद होंगे
    हमारी छोड़ी हुई उदासी से सात नस्लें उदास होंगी

    Danish Naqvi
    57 Likes

    देखो मुझे अब मेरी जगह से न हिलाना
    फिर तुम मुझे तरतीब से रख कर नहीं जाते

    Danish Naqvi
    31 Likes

    सो तुम मुझे हैरत-ज़दा आँखों से न देखो
    कुछ लोग सँभल जाते हैं सब मर नहीं जाते

    Danish Naqvi
    37 Likes

    जाते हुए कमरे की किसी चीज़ को छू दे
    मैं याद करूँगा के तेरे हाथ लगे थे

    Danish Naqvi
    41 Likes

Top 10 of Similar Writers