जो पर्दादारी चली तो यारी नहीं चलेगी
हमारी दुनिया में दुनियादारी नहीं चलेगी
हमारी दुनिया में दुनियादारी नहीं चलेगी
तुम्हारे जाने पे दिल का दफ़्तर समेट लेंगे
फिर इस सड़क पर कोई सवारी नहीं चलेगी
परिंदे भी बे-घरी से पहले ये सोचते थे
कि सब्ज़ पेड़ों पे कोई आरी नहीं चलेगी
हम अपनी मर्ज़ी से उस के दिल में रहा करेंगे
हमारे घर में भी क्या हमारी नहीं चलेगी
तुम्हारी चीखों से वो दरीचा नहीं खुलेगा
बड़ी दुकानों पे रेज़गारी नहीं चलेगी
हुज़ूर-ए-वाला ये आशू मिश्रा का दिल है इसपर
हसीन चेहरों की होशियारी नहीं चलेगी
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ग़म में हम सूरत-ए-गमख़ार नहीं पढ़ते हैं
इस लिए मीर के अश'आर नहीं पढ़ते हैं
इस लिए मीर के अश'आर नहीं पढ़ते हैं
मेरी आँखें तेरी तस्वीर से जा लगती हैं
सुब्ह उठकर सभी अख़बार नहीं पढ़ते हैं
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साथ में तू मेरे दो गाम तो चल सकता है
इतना चलने से मेरा काम तो चल सकता है
Read Fullइतना चलने से मेरा काम तो चल सकता है
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तुम्हारा दिल यहाँ पर खो गया तो कैसी हैरत है
बरेली में तो झुमके तक निकल जाते हैं कानों से
बरेली में तो झुमके तक निकल जाते हैं कानों से
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मैं इश्क़ कर रहा हूँ मगर सोचता भी हूँ
पिछले बरस जो हो चुका अब के बरस न हो
पिछले बरस जो हो चुका अब के बरस न हो
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उदासी का सबब दो चार ग़म होते तो कह देता
फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है
फ़ुलाँ को भूल बैठा हूँ फ़ुलाँ की याद आती है
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