जब भी माँगूँ तेरी ख़ुशी माँगूँ
और दुआएँ ख़ुदा तलक जाएँ
ख़्वाब आएँ तो नींद यूँ महके
आँख से ख़ुशबुएँ छलक जाएँ
तू मोहब्बत नहीं समझती है
हम भी अपनी अना में जलते हैं
इस दफा बंदिशें ज़ियादा हैं
छोड़ अगले जनम में मिलते हैं
कहा था क्या और क्या बने हो
अजब सा इक मसअला बने हो
हमारी मर्ज़ी कहाँ थी शामिल
तुम अपने मन से ख़ुदा बने हो
अपनी दुनिया में खोए जाता हूँ
कोई पूछे तो मुस्कुराता हूँ
एक लड़की है जिसकी ख़ातिर मैं
ख्वाब में तितलियाँ उड़ाता हूँ
उसका चेहरा बनाए से न बने
इसलिए खुशबुएँ बनाता हूँ
कल मोहब्बत में फूल आएँगे
अपने आँसू मैं बोए जाता हूँ
न वैसा चाँद फिर निकला न वैसी ईद फिर आई
किसी ने जब मेरी ईदी मेरे होटों पे रख दी थी
जिसकी ख़ातिर कितनी रातें सुलगाई
जिसके दुख में दिल जाने क्यों रोता है
इक दिन हमसे पूछ रही थी वो लड़की
प्यार में कोई पागल कैसे होता है
सब कुछ पा कर थोड़ा सा कुछ कम भी रहता है
इन ख़ुशियों में एक तुम्हारा ग़म भी रहता है