मिरी आरज़ू का हासिल तिरे लब की मुस्कुराहट
हैं क़ुबूल मुझ को सब ग़म तिरी इक ख़ुशी के बदले
करे जो क़ैद जुनूं को वो जाल मत देना
हो जिसमें होश उसे ऐसा हाल मत देना
जो मुझसे मिलने का तुमको कभी ख़याल आये
तो इस ख़याल को तुम कल पे टाल मत देना
परिन्दे जिस तरह से आबो दाना ढूँढ लेते हैं
जो हैं ख़ाना बदोश अपना ठिकाना ढूँढ लेते हैं
तुम अपने दिल पे रख के हाथ छुप जाओ तो क्या होगा
जो तीर अन्दाज़ हैं अपना निशाना ढूँढ लेते हैं
हमारे अश्क तो बरबाद होंगे ख़ाक पे गिर के
वो रोने के लिए भी कोई शाना ढूँढ लेते हैं
बुरा क्या है अगर हम मस्त हैं अपनी फ़क़ीरी में
जो ऊंचे लोग हैं ऊंचा घराना ढूँढ लेते हैं
मोहब्बत से जो अक्सर चूमते हैं माँ के क़दमों को
वो दुनिया ही में जन्नत का ख़ज़ाना ढूँढ लेते हैं
हज़ारों ग़म हैं दिल में आंख में अश्कों का दरिया है
मगर हंसने का हम फिर भी बहाना ढूँढ लेते हैं
हैं हर जानिब मनाज़िर नफ़रतों के फिर भी ऐ काशिफ़
हम अहले दिल मोहब्बत का तराना ढूँढ लेते हैं
वो चाँद सा इक चेहरा सोने पे सुहागा है
और उसपे है तिल काला सोने पे सुहागा है
कुछ फ़र्क़ पड़ा उस पर बदली न रविश उसकी
दीवाना है और सहरा सोने पे सुहागा है
बेहाल परीशाँ हूं दुनिया का हूं ठुकराया
और मुझ पे तिरा हँसना सोने पे सुहागा है
भाई की कलाई पर बाँधा है जो बहनों ने
हाँ प्यार का ये धागा सोने पे सुहागा है
वो जब भी कभी बोलें मोती से बरसते हैं
और जादू भरा लहजा सोने पे सुहागा है
है नाम तिरा लब पर आंखों में तिरी सूरत
और सर पे तिरा साया सोने पे सुहागा है
शीरीनी है लज़्ज़त है हर लफ़्ज़ अनोखा है
ये उर्दू ज़बां भी क्या सोने पे सुहागा है
तारीफ़ मैं कर पाऊं किस तरह भला काशिफ़
वो शख़्स ही सरमाया सोने पे सुहागा है
देखिये मायूस चेहरे पर हंसी की हाज़िरी
दिल में जब हो जाये धोके से ख़ुशी की हाज़िरी
अब ख़ुदा जाने कि हो अन्जाम क्या नादान का
शाख़ पर है फूल की सूरत कली की हाज़िरी
कैसे लफ़्ज़ों में बयाँ हो पाये ये मन्ज़र हसीं
आस्मा पर चाँद घर में चाँदनी की हाज़िरी
एक तो आंखें मुशर्रफ़ होंगी उनकी दीद से
और हो जायेगी ऐसे हाज़िरी की हाज़िरी
करते हैं दो प्यार करने वाले जब आपस में बात
अच्छी लगती है कहाँ उस दम किसी की हाज़िरी
उस गली में कोई मुझको जानने वाला नहीं
मुद्दतों मैं ने लगाई जिस गली की हाज़िरी
बा अदब हो कर खड़े हैं हाज़िरे दरबार सब
ज़िन्दगानी ले रही है अब सभी की हाज़िरी
उस हसीं चेहरे का ही फ़ैज़ान है काशिफ़ अदीब
ज़ेह्न में होने लगी है शाइरी की हाज़िरी
हर इक बुरी नज़र से बचा कीजिये हुज़ूर
दिल में हमारे आप रहा कीजिये हुज़ूर
काटें हम एक साथ सज़ा जिसकी उम्र भर
ऐसी कोई हसीन ख़ता कीजिये हुज़ूर
पेचीदा मोड़ इश्क़ में आगे भी आयेंगे
यूँ बात बात पर न डरा कीजिये हुज़ूर
इनकी नसीहतें किसी नेमत से कम नहीं
कोई बड़ा कहे तो सुना कीजिये हुज़ूर
इल्ज़ाम बे वफ़ाई का और मेरी ज़ात पर
इस बात पर ज़रा तो हया कीजिये हुज़ूर
अब अनक़रीब है मेरी क़िस्मत का फ़ैसला
अब आप मेरे हक़ में दुआ कीजिये हुज़ूर
पहली सी क्यूँ दिलों में मोहब्बत नहीं रही
इस बात का ख़ुद आप पता कीजिये हुज़ूर
काशिफ़ को भी ख़ुमारे मोहब्बत की है तलाश
बस एक जामे इश्क़ अता कीजिये हुज़ूर
करे जो क़ैद जुनूं को वो जाल मत देना
हो जिसमें होश उसे ऐसा हाल मत देना
जो मुझसे मिलने का तुमको कभी ख़याल आये
तो इस ख़याल को तुम कल पे टाल मत देना
जो उसको देखूं तो बस देखता रहूं उसको
अब उसके जैसा किसी को जमाल मत देना
जुनूं की रौ में जो दीवाना डगमगाये कभी
तो ऐसे हाल में उसको सम्भाल मत देना
तुम्हारी याद से ग़ाफ़िल मैं जिससे रहने लगूं
मुझे तुम ऐसा हुनर या कमाल मत देना
फ़िराक़े यार में ये बाइसे मसर्रत हैं
तुम उनकी यादों को दिल से निकाल मत देना
ख़ुलूस बेच के दौलत कमाई हो जिसने
तुम ऐसे शख़्स की हमसे मिसाल मत देना
तुम ही ने बख़्शा है काशिफ़ को अपने इतना उरूज
अब इस मुक़ाम पे लाकर ज़वाल मत देना
तुम भी मुझको ऐसा वैसा समझे क्या
होश में आओ अपने जैसा समझे क्या
उनके लबों पर मेरा चर्चा समझे क्या
कैसे बही ये उल्टी गंगा समझे क्या
लाख उसे दुनियादारी समझाई मगर
दीवाना तो फिर दीवाना समझे क्या
हस्ती को हंस हंस के मिटाना पड़ता है
दिल का लगाना खेल तमाशा समझे क्या
आँखो ही आँखो में तुमको ऐ हमदम
अब तक मैंने जो समझाया समझे क्या
वो मासूम तो एक खिलौना समझेगा
अंगारा या फूल है बच्चा समझे क्या
पाप दिलों में खोट है सबकी आँखों में
तेरा मेरा रिश्ता दुनिया समझे क्या
आपने ही जब ग़ैर बना डाला मुझको
कोई मुझे दुनिया में अपना समझे क्या
मैं इक चाँद हूं अपने गगन का ऐ काशिफ़
आप मुझे टूटा हुआ तारा समझे क्या
मिले अगर तुम्हें फ़ुर्सत हमारे शेर सुनो
भुला के सारी अदावत हमारे शेर सुनो
नये ख़याल नये ज़ाविये नये पहलू
मिलेगी फ़िक्र को नुदरत हमारे शेर सुनो
हर एक रन्जो अलम दर्द भूल जाओगे
करो जो इतनी सी ज़हमत हमारे शेर सुनो
किसी के दिल में जगह किस तरह बनानी है
ये सीखने की हो चाहत हमारे शेर सुनो
फ़ज़ा में चारो तरफ़ नफ़रतों का राज है अब
है वक़्त की ये ज़ुरुरत हमारे शेर सुनो
इन्हीं से फ़ैज़ उठाते हैं सारे दीवाने
बदलना चाहो जो क़िस्मत हमारे शेर सुनो
ये तुमको जीने का उस वक़्त हौसला देंगे
कि जब हो तुम पे मुसीबत हमारे शेर सुनो
इन्हीं ने दुनिया में पहचान हमको दी काशिफ़
हैं अपने वास्ते नेमत हमारे शेर सुनो