Gulzar

Top 10 of Gulzar

    मुझको इतने से काम पे रख लो

    जब भी सीने में झूलता लॉकेट
    उल्टा हो जाये तो मैं हाथों से
    सीधा करता रहूं उसको

    जब भी आवेज़ा उलझे बालों में
    मुस्कुरा के बस इतना-सा कह दो
    'आह, चुभता है यह, अलग कर दो।'

    जब ग़रारे में पांव फंस जाये
    या दुपट्टा किसी किवाड़ से अटके
    इक नज़र देख लो तो काफ़ी है

    'प्लीज़' कह दो तो अच्छा है
    लेकिन मुस्कुराने की शर्त पक्की है
    मुस्कुराहट मुआवज़ा है मेरा

    मुझको इतने से काम पे रख लो

    Gulzar
    10
    67 Likes

    शाम से आँख में नमी सी है
    आज फिर आप की कमी सी है

    दफ़्न कर दो हमें कि साँस आए
    नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है

    कौन पथरा गया है आँखों में
    बर्फ़ पलकों पे क्यूँ जमी सी है

    वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
    आदत इस की भी आदमी सी है

    आइए रास्ते अलग कर लें
    ये ज़रूरत भी बाहमी सी है

    Gulzar
    18 Likes

    दर्द हल्का है साँस भारी है
    जिए जाने की रस्म जारी है

    आप के ब'अद हर घड़ी हम ने
    आप के साथ ही गुज़ारी है

    रात को चाँदनी तो ओढ़ा दो
    दिन की चादर अभी उतारी है

    शाख़ पर कोई क़हक़हा तो खिले
    कैसी चुप सी चमन पे तारी है

    कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था
    आज की दास्ताँ हमारी है

    Gulzar
    15 Likes

    दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
    जैसे एहसाँ उतारता है कोई

    दिल में कुछ यूँ सँभालता हूँ ग़म
    जैसे ज़ेवर सँभालता है कोई

    आइना देख कर तसल्ली हुई
    हम को इस घर में जानता है कोई

    पेड़ पर पक गया है फल शायद
    फिर से पत्थर उछालता है कोई

    देर से गूँजते हैं सन्नाटे
    जैसे हम को पुकारता है कोई

    Gulzar
    7 Likes

    कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
    उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की

    Gulzar
    44 Likes

    कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
    किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

    Gulzar
    83 Likes

    आइना देख कर तसल्ली हुई
    हम को इस घर में जानता है कोई

    Gulzar
    53 Likes

    वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
    आदत इस की भी आदमी सी है

    Gulzar
    113 Likes

    याद है एक दिन?
    मेरी मेज़ पे बैठे-बैठे
    सिगरेट की डिबिया पर तुमने
    एक स्केच बनाया था

    आकर देखो
    उस पौधे पर फूल आया है.

    Gulzar
    2
    37 Likes

    मैं सिगरेट तो नहीं पीता
    मगर हर आने वाले से पूछ लेता हूँ कि "माचिस है?"
    बहुत कुछ है जिसे मैं फूँक देना चाहता हूँ.

    Gulzar
    1
    107 Likes

Top 10 of Similar Writers