इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग
रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग
रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग
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तुम से इक दिन कहीं मिलेंगे हम
ख़र्च ख़ुद को तभी करेंगे हम
ख़र्च ख़ुद को तभी करेंगे हम
इश्क़! तुझ को ख़बर भी है? अब के
तेरे साहिल से जा लगेंगे हम
किस ने रस्ते में चाँद रक्खा है
उस से टकरा के गिर पड़ेंगे हम
आसमानों में घर नहीं होते
मर गए तो कहाँ रहेंगे हम
धूप निकली है तेरी बातों की
आज छत पर पड़े रहेंगे हम
जो भी कहना है उस को कहना है
उस के कहने पे क्या कहेंगे हम
रोक लेंगे मुझे तिरे आँसू
ऐसे पानी पे क्या चलेंगे हम
वो सुनेगी जो सुनना चाहेगी
जो भी कहना है वो कहेंगे हम
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कुछ भी नहीं होने की उलझन कुछ भी नहीं है तुम तो हो
ऐ मेरे दिल दश्त की जोगन कुछ भी नहीं है तुम तो हो
ऐ मेरे दिल दश्त की जोगन कुछ भी नहीं है तुम तो हो
तुम से एक धनक फूटेगी और कमरे में बिखरेगी
दीवारों पे रंग न रोग़न कुछ भी नहीं है तुम तो हो
इक दर्पन जो ठीक मिरे दिल ही के अंदर खुलता है
देख रहा हूँ मैं वो दर्पन कुछ भी नहीं है तुम तो हो
मेरे ख़यालों की दुनिया में कुछ भी नहीं जानाँ लेकिन
कम नहीं करना अपनी बन-ठन कुछ भी नहीं है तुम तो हो
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