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Ameeta Parsuram Meeta

Top 10 of Ameeta Parsuram Meeta

Ameeta Parsuram Meeta

Top 10 of Ameeta Parsuram Meeta

    ज़िंदगी अपना सफ़र तय तो करेगी लेकिन
    हम-सफ़र आप जो होते तो मज़ा और ही था
    Ameeta Parsuram Meeta
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    वक़्त से लम्हा लम्हा खेली है
    ज़िंदगी इक अजब पहेली है

    आज मौसम भी कुछ उदास मिला
    आज तन्हाई भी अकेली है

    उस की यादें भी बे-वफ़ा निकलीं
    सिर्फ़ तन्हाई अब सहेली है

    उस की यादों में फिर से दस्तक दी
    ख़ूब मौसम ने चाल खेली है

    जीने मरने के दरमियाँ 'मीता'
    रूह ने जैसे क़ैद झेली है
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    Ameeta Parsuram Meeta
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    अगर है ज़िंदगी इक जश्न तो ना-मेहरबाँ क्यूँ है
    फ़सुर्दा रंग में डूबी हुई हर दास्ताँ क्यूँ है

    तुम्हें हम से मोहब्बत है हमें तुम से मोहब्बत है
    अना का दायरा फिर भी हमारे दरमियाँ क्यूँ है

    वही सब कुछ रज़ा उस की तो फिर दिल में गुमाँ क्यूँ है
    सवालों और जवाबों से परेशाँ मेरी जाँ क्यूँ है

    हर इक मंज़र के पस-मंज़र में तेरा ही करिश्मा है
    यक़ीनन ख़ालिक़-ए-कुन तू तो आँखों से निहाँ क्यूँ है

    तुझी को है मुयस्सर हर बुराई का दमन करना
    तो ना-इंसाफ़ियों के दौर में तू बे-ज़बाँ क्यूँ है
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    Ameeta Parsuram Meeta
    8
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    कह भी दूँ हाल-ए-दिल अगर शायद
    उन पे हो जाए कुछ असर शायद

    अब ज़माना है बे-वफ़ाई का
    सीख लें हम भी ये हुनर शायद

    बा'द मुद्दत के ये ख़याल आया
    रास आया नहीं सफ़र शायद

    हम ही अब तक समझ नहीं पाए
    कुछ तो कहती है वो नज़र शायद

    वैसे तो फ़ासला नहीं कोई
    कश्मकश है अगर मगर शायद

    हर नज़ारे में उस का ही जल्वा
    तुम को आता नहीं नज़र शायद

    अजनबी अजनबी से चेहरे हैं
    ये नहीं है मिरा नगर शायद

    नींद तारी है आसमानों पर
    या दुआ में नहीं असर शायद

    अब कोई आरज़ू नहीं बाक़ी
    ख़त्म होता है ये सफ़र शायद

    मौज-दर-मौज एक नश्शा था
    अब वो दरिया गया उतर शायद

    ज़िंदगी अब तुझे सँवारे क्या
    कोशिशें सारी बे-असर शायद

    इक जहाँ अजनबी रहा 'मीता'
    इक जहाँ मुझ से बा-ख़बर शायद
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    Ameeta Parsuram Meeta
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    वफ़ा की शान वो लेकिन कभी मिरे न हुए
    है मेरी जान वो लेकिन कभी मिरे न हुए

    उन्हीं का ज़िक्र ग़ज़ल भी वही फ़साना भी
    सुख़न की आन वो लेकिन कभी मिरे न हुए

    नशा है उन की सदा का कि धड़कनें मेरी
    रहा गुमान वो लेकिन कभी मिरे न हुए

    गुलों में रंग उन्हीं से महक महक उन से
    चमन की शान वो लेकिन कभी मिरे न हुए

    वही हैं शम्स ओ क़मर बहर ओ बर मिरे 'मीता'
    हैं इक जहान वो लेकिन कभी मिरे न हुए
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    Ameeta Parsuram Meeta
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    ये आरज़ू है कि अब कोई आरज़ू न रहे
    किसी सफ़र किसी मंज़िल की जुस्तुजू न रहे

    अजीब दिल है इसी दिल का अब तक़ाज़ा है
    किसी भी बज़्म में अब उस की गुफ़्तुगू न रहे

    मज़ा तभी है मोहब्बत में ग़र्क़ होने का
    मैं डूब जाऊँ तो ये हो कि तू भी तू न रहे

    बताओ उन की इबादत क़ुबूल क्या होगी
    नमाज़-ए-इश्क़ में जो लोग बा-वज़ू न रहे

    ख़ुदा बना दिया उन को मेरी मोहब्बत ने
    हमेशा दिल में रहे और रू-ब-रू न रहे
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    कम्बख़्त दिल ने इश्क़ को वहशत बना दिया
    वहशत को हम ने बाइस-ए-रहमत बना दिया

    क्या क्या मुग़ालते दिए दौर-ए-जदीद ने
    नफ़रत को प्यार प्यार को नफ़रत बना दिया

    हम ने हज़ार फ़ासले जी कर तमाम शब
    इक मुख़्तसर सी रात को मुद्दत बना दिया

    ऐ जान अपने दिल पे मुझे नाज़ क्यूँ न हो
    इक ख़्वाब था कि जिस को हक़ीक़त बना दिया

    मख़्सूस हद पे आ गई जब बे-रुख़ी तिरी
    उस हद को हम ने हासिल-ए-क़िस्मत बना दिया
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    Ameeta Parsuram Meeta
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    बन गए दिल के फ़साने क्या क्या
    खुल गए राज़ न जाने क्या क्या

    कौन था मेरे अलावा उस का
    उस ने ढूँडे थे ठिकाने क्या क्या

    रहमत-ए-इश्क़ ने बख़्शे मुझ को
    उस की यादों के ख़ज़ाने क्या क्या

    आज रह रह के मुझे याद आए
    उस के अंदाज़ पुराने क्या क्या

    रक़्स करती हुई यादें उन की
    और दिल गाए तराने क्या क्या

    तेरा अंदाज़ निराला सब से
    तीर तो एक निशाने क्या क्या

    आरज़ू मेरी वही है लेकिन
    उस को आते हैं बहाने क्या क्या

    राज़-ए-दिल लाख छुपाया लेकिन
    कह दिया उस की अदा ने क्या क्या

    दिल ने तो दिल ही की मानी 'मीता'
    अक़्ल देती रही ता'ने क्या क्या
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    Ameeta Parsuram Meeta
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    शिद्दत-ए-शौक़ से अफ़्साने तो हो जाते हैं
    फिर न जाने वही आशिक़ कहाँ खो जाते हैं

    मुझ से इरशाद ये होता है कि समझूँ उन को
    और फिर भीड़ में दुनिया की वो खो जाते हैं

    दर्द जब ज़ब्त की हर हद से गुज़र जाता है
    ख़्वाब तन्हाई के आग़ोश में सो जाते हैं

    बस यूँही कहते हैं वो मेरे हैं मेरे होंगे
    और इक पल में किसी और के हो जाते हैं

    हम तो पाबंद-ए-वफ़ा पहले भी थे आज भी हैं
    आप ही फ़ासले ले आए तो लो जाते हैं

    कोई तदबीर न तक़दीर से लेना-देना
    बस यूँही फ़ैसले जो होने हैं हो जाते हैं

    कुछ तो एहसास-ए-मोहब्बत से हुईं नम आँखें
    कुछ तिरी याद के बादल भी भिगो जाते हैं
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    Ameeta Parsuram Meeta
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    ज़िंदगी अपना सफ़र तय तो करेगी लेकिन
    हम-सफ़र आप जो होते तो मज़ा और ही था

    का'बा ओ दैर में अब ढूँड रही है दुनिया
    जो दिल ओ जान में बस्ता था ख़ुदा और ही था

    अब ये आलम है कि दौलत का नशा तारी है
    जो कभी इश्क़ ने बख़्शा था नशा और ही था

    दूर से यूँही लगा था कि बहुत दूरी है
    जब क़रीब आए तो जाना कि गिला और ही था

    मेरे दिल ने तो तुझे और ही दस्तक दी थी
    तू ने ऐ जान जो समझा जो सुना और ही था
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Balmohan PandeyBalmohan PandeyLala Madhav Ram JauharLala Madhav Ram JauharAnand Raj SinghAnand Raj SinghAzm ShakriAzm ShakriIsmail RaazIsmail RaazNida FazliNida FazliMuneer NiyaziMuneer NiyaziAziz NabeelAziz NabeelAkhtar Saeed KhanAkhtar Saeed KhanSaba AkbarabadiSaba Akbarabadi