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Lala Madhav Ram Jauhar

Top 10 of Lala Madhav Ram Jauhar

Lala Madhav Ram Jauhar

Top 10 of Lala Madhav Ram Jauhar

    आप तो मुँह फेर कर कहते हैं आने के लिए
    वस्ल का वा'दा ज़रा आँखें मिला कर कीजिए
    Lala Madhav Ram Jauhar
    10
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    तेरे कूचे की हुआ लग गई शायद उस को
    रोज़ बे-पर की उड़ाता है कबूतर हम से

    हम सुलैमान बनेंगे जो परी होगे तुम
    होश में आओ कहाँ जाओगे उड़ कर हम से

    गालियाँ कौन सुने जब न रहा कुछ मतलब
    आज से कीजिएगा बात समझ कर हम से

    हम किसी और को ताकेंगे तुम्हारे होते
    क्या कहा फिर तो कहो आँख मिला कर हम से

    आप हो जाएँगे सीधे कहीं दिन हों सीधे
    वो भी टेढ़े हैं जो टेढ़ा है मुक़द्दर हम से

    वो भी क्या दिन थे कि जब रहती थीं नीची नज़रें
    चार आँखें जो हुईं फिर गए तेवर हम से
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    Lala Madhav Ram Jauhar
    9
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    क्या याद कर के रोऊँ कि कैसा शबाब था
    कुछ भी न था हवा थी कहानी थी ख़्वाब था

    अब इत्र भी मलो तो तकल्लुफ़ की बू कहाँ
    वो दिन हवा हुए जो पसीना गुलाब था

    महमिल-नशीं जब आप थे लैला के भेस में
    मजनूँ के भेस में कोई ख़ाना-ख़राब था

    तेरा क़ुसूर-वार ख़ुदा का गुनाहगार
    जो कुछ कि था यही दिल-ए-ख़ाना-ख़राब था

    ज़र्रा समझ के यूँ न मिला मुझ को ख़ाक में
    ऐ आसमान मैं भी कभी आफ़्ताब था
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    Lala Madhav Ram Jauhar
    8
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    वही शागिर्द फिर हो जाते हैं उस्ताद ऐ 'जौहर'
    जो अपने जान-ओ-दिल से ख़िदमत-ए-उस्ताद करते हैं
    Lala Madhav Ram Jauhar
    7
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    जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुलह की दुआ
    दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो
    Lala Madhav Ram Jauhar
    6
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    मुँह पर नक़ाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ़ पर गुलाल
    होली की शाम ही तो सहर है बसंत की
    Lala Madhav Ram Jauhar
    5
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    मोहब्बत को छुपाए लाख कोई छुप नहीं सकती
    ये वो अफ़्साना है जो बे-कहे मशहूर होता है
    Lala Madhav Ram Jauhar
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    नाला-ए-बुलबुल-ए-शैदा तो सुना हँस हँस कर
    अब जिगर थाम के बैठो मिरी बारी आई
    Lala Madhav Ram Jauhar
    3
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    मेरी ही जान के दुश्मन हैं नसीहत वाले
    मुझ को समझाते हैं उन को नहीं समझाते हैं
    Lala Madhav Ram Jauhar
    2
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    रात दिन चैन हम ऐ रश्क-ए-क़मर रखते हैं 
    शाम अवध की तो बनारस की सहर रखते हैं 

    भाँप ही लेंगे इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया 
    ताड़ने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं 

    ढूँढ़ लेता मैं अगर और किसी जा होते 
    क्या कहूँ आप दिल-ए-ग़ैर में घर रखते हैं 

    अश्क क़ाबू में नहीं राज़ छुपाऊँ क्यूँकर 
    दुश्मनी मुझ से मिरे दीदा-ए-तर रखते हैं 

    कैसे बे-रहम हैं सय्याद इलाही तौबा 
    मौसम-ए-गुल में मुझे काट के पर रखते हैं 

    कौन हैं हम से सिवा नाज़ उठाने वाले 
    सामने आएँ जो दिल और जिगर रखते हैं 

    दिल तो क्या चीज़ है पत्थर हो तो पानी हो जाए 
    मेरे नाले अभी इतना तो असर रखते हैं 

    चार दिन के लिए दुनिया में लड़ाई कैसी 
    वो भी क्या लोग हैं आपस में शरर रखते हैं 

    हाल-ए-दिल यार को महफ़िल में सुनाऊँ क्यूँ कर 
    मुद्दई कान उधर और इधर रखते हैं 

    जल्वा-ए-यार किसी को नज़र आता कब है 
    देखते हैं वही उस को जो नज़र रखते हैं 

    आशिक़ों पर है दिखाने को इताब ऐ 'जौहर' 
    दिल में महबूब इनायत की नज़र रखते हैं 

    अश्क क़ाबू में नहीं राज़ छुपाऊँ क्यूँकर 
    दुश्मनी मुझ से मिरे दीदा-ए-तर रखते हैं 

    कैसे बे-रहम हैं सय्याद इलाही तौबा 
    मौसम-ए-गुल में मुझे काट के पर रखते हैं 

    कौन हैं हम से सिवा नाज़ उठाने वाले 
    सामने आएँ जो दिल और जिगर रखते हैं

     दिल तो क्या चीज़ है पत्थर हो तो पानी हो जाए 
    मेरे नाले अभी इतना तो असर रखते हैं 

    चार दिन के लिए दुनिया में लड़ाई कैसी 
    वो भी क्या लोग हैं आपस में शरर रखते हैं 

    हाल-ए-दिल यार को महफ़िल में सुनाऊँ क्यूँ कर 
    मुद्दई कान उधर और इधर रखते हैं

     जल्वा-ए-यार किसी को नज़र आता कब है 
    देखते हैं वही उस को जो नज़र रखते हैं 

    आशिक़ों पर है दिखाने को इताब ऐ 'जौहर' 
    दिल में महबूब इनायत की नज़र रखते हैं 
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    Lala Madhav Ram Jauhar
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Fahmi BadayuniFahmi BadayuniZafar IqbalZafar IqbalVishal BaghVishal BaghYasmeen HameedYasmeen HameedJaan Nisar AkhtarJaan Nisar AkhtarAnand Raj SinghAnand Raj SinghTaimur HasanTaimur HasanGhulam Mohammad QasirGhulam Mohammad QasirAhmad FarazAhmad FarazFakhira batoolFakhira batool