Fahmi Badayuni

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    दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो
    साँस लेना कोई सुबूत नहीं

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    मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है
    इबादत से गुज़ारा कर रहे है

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    हाल मीठे फलों का मत पूछो
    रात दिन चाकूओं में रहते हैं

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    बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे
    उसके बदले में किस को याद करें

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    उसकी जुल्फ़ें उदास हो जाए
    इस-क़दर रोशनी भी ठीक नहीं

    तुमने नाराज़ होना छोड़ दिया
    इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं

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    समंदर उल्टा सीधा बोलता है
    सलीक़े से तो प्यासा बोलता है

    यहाँ तो उसका पैसा बोलता है
    वहाँ देखेंगे वो क्या बोलता है

    तुम्हारे साथ उड़ाने बोलती है
    हमारे साथ पिंजरा बोलता है

    निगाहें करती रह जाती हैं हिज्जे
    वो जब चेहरे से इमला बोलता है

    मैं चुप रहता हूँ इतना बोल कर भी
    तू चुप रह कर भी कितना बोलता है

    मैं हर शायर में ये भी देखता हूँ
    बिना माइक के वो क्या बोलता है

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    तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ
    मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ

    कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो
    मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ

    ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे
    यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ

    अदाकारी बहुत दुख दे रही है
    मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ

    परों में तीर है पंजों में तिनके
    मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ

    लिए बैठा हूँ घुंघरू फूल मोती
    तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ

    अमीरी 'इश्क़ की तुम को मुबारक
    मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ

    मैं सारे शहर की बैसाखियों को
    तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ

    मुझे तुमसे बिछड़ना ही पड़ेगा
    मैं तुमको याद आना चाहता हूँ

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    कुछ न कुछ बोलते रहो हमसे
    चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे

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    तेरे जैसा कोई मिला ही नहीं
    कैसे मिलता कहीं पे था ही नहीं

    घर के मलबे से घर बना ही नहीं
    ज़लज़ले का असर गया ही नहीं

    मुझ पे हो कर गुज़र गई दुनिया
    मैं तिरी राह से हटा ही नहीं

    कल से मसरूफ़-ए-ख़ैरियत मैं हूँ
    शेर ताज़ा कोई हुआ ही नहीं

    रात भी हम ने ही सदारत की
    बज़्म में और कोई था ही नहीं

    यार तुम को कहाँ कहाँ ढूँडा
    जाओ तुम से मैं बोलता ही नहीं

    याद है जो उसी को याद करो
    हिज्र की दूसरी दवा ही नहीं

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    पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा
    कितना आसान था इलाज मिरा

    चारा-गर की नज़र बताती है
    हाल अच्छा नहीं है आज मिरा

    मैं तो रहता हूँ दश्त में मसरूफ़
    क़ैस करता है काम-काज मिरा

    कोई कासा मदद को भेज अल्लाह
    मेरे बस में नहीं है ताज मिरा

    मैं मोहब्बत की बादशाहत हूँ
    मुझ पे चलता नहीं है राज मिरा

    Fahmi Badayuni
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