वो मेरी दुनिया का हिस्सा थी मेरी दुनिया नहीं
इक शजर कटने से वन वीरान हो जाएगा क्या
फोन भी आया तो शिकवे के लिए
फूल भी भेजा तो मुरझाया हुआ
रास्ते की मुश्किलें तो जान लूँ
आता होगा उसका ठुकराया हुआ
सारी दुनिया की निगाहों से बचाकर रखना,
अपनी आँखों में ही हर दर्द का ज़ेवर रखना
उसको आदत ये परेशान बहोत रक्खेगी,
उसकी आदत थी मेरा हाथ पकड़कर रखना
इसका क्या शिकवा उसे रोक नहीं पाए हम,
एक मुफ़लिस को कहाँ आता है ज़ेवर रखना
हाय! वो इश्क़ छिपाने के ज़माने मोहन!
याद आता है गलत नाम से नम्बर रखना
हम हैं रहे-उम्मीद से बिल्कुल परे परे
अब इंतज़ार आपका कोई करे! करे!
मैंने तो यूँ ही अपनी तबीयत सुनाई थी
तुम तो लगीं सफाइयाँ देने, अरे! अरे!
इसीलिए मैं बिछड़ने पर सोगवार नहीं,
सुकून पहली ज़रूरत है, तेरा प्यार नहीं!
जवाब ढ़ूंढ़ने में उम्र मत गँवा देना,
सवाल करती है दुनिया पर एतबार नहीं
हमारा इश्क़ इबादत का अगला दर्जा है
ख़ुदा ने छोड़ दिया तो तुम्हारा नाम लिया
ग़मों से बैर था सो हमने ख़ुदकुशी कर ली
शजर ने गिर के परिन्दों से इन्तेक़ाम लिया