10
0 Likes
9
0 Likes
8
0 Likes
7
0 Likes
हर शख़्स परेशान है घबराया हुआ है
महताब बड़ी देर से गहनाया हुआ है
महताब बड़ी देर से गहनाया हुआ है
है कोई सख़ी इस की तरफ़ देखने वाला
ये हाथ बड़ी देर से फैलाया हुआ है
हिस्सा है किसी और का इस कार-ए-ज़ियाँ में
सरमाया किसी और का लगवाया हुआ है
साँपों में असा फेंक के अब महव-ए-दुआ हूँ
मालूम है दीमक ने उसे खाया हुआ है
दुनिया के बुझाने से बुझी है न बुझेगी
इस आग को तक़दीर ने दहकाया हुआ है
क्या धूप है जो अब्र के सीने से लगी है
सहरा भी उसे देख के शरमाया हुआ है
इसरार न कर मेरे ख़राबे से चला जा
मुझ पर किसी आसेब का दिल आया हुआ है
तू ख़्वाब-ए-दिगर है तिरी तदफ़ीन कहाँ हो
दिल में तो किसी और को दफ़नाया हुआ है
6
0 Likes
गिर जाए जो दीवार तो मातम नहीं करते
करते हैं बहुत लोग मगर हम नहीं करते
करते हैं बहुत लोग मगर हम नहीं करते
है अपनी तबीअत में जो ख़ामी तो यही है
हम इश्क़ तो करते हैं मगर कम नहीं करते
नफ़रत से तो बेहतर है कि रस्ते ही जुदा हों
बेकार गुज़रगाहों को बाहम नहीं करते
हर साँस में दोज़ख़ की तपिश सी है मगर हम
सूरज की तरह आग को मद्धम नहीं करते
क्या इल्म कि रोते हों तो मर जाते हों 'फ़ैसल'
वो लोग जो आँखों को कभी नम नहीं करते
5
1 Like
तेरी आँखें न रहीं आईना-ख़ाना मिरे दोस्त
कितनी तेज़ी से बदलता है ज़माना मिरे दोस्त
कितनी तेज़ी से बदलता है ज़माना मिरे दोस्त
जाने किस काम में मसरूफ़ रहा बरसों तक
याद आया ही नहीं तुझ को भुलाना मिरे दोस्त
पूछना मत कि ये क्या हाल बना रक्खा है
आईना बन के मिरा दिल न दुखाना मिरे दोस्त
इस मुलाक़ात में जो ग़ैर-ज़रूरी हो जाए
याद रहता है किसे हाथ मिलाना मिरे दोस्त
देखना मुझ को मगर मेरी पज़ीराई को
अपनी आँखों में सितारे न सजाना मिरे दोस्त
अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वाली
मैं न कहता था बहुत दूर न जाना मरे दोस्त
हिज्र तक़दीर में लिक्खा था कि मजबूरी थी
छोड़ इस बात से क्या मिलना मिलाना मिरे दोस्त
तू ने एहसान किया अपना बना कर मुझ को
वर्ना मैं क्या था हक़ीक़त न फ़साना मिरे दोस्त
इस कहानी में किसे कौन कहाँ छोड़ गया
याद आ जाए तो मुझ को भी बताना मिरे दोस्त
छोड़ आया हूँ हवाओं की निगहबानी में
वो समुंदर वो जज़ीरा वो ख़ज़ाना मिरे दोस्त
ऐसे रस्तों पे जो आपस में कहीं मिलते हों
क्यूँ न उस मोड़ से हो जाएँ रवाना मिरे दोस्त
4
0 Likes
3
0 Likes
तेरी आँखें न रहीं आईना-ख़ाना मिरे दोस्त
कितनी तेज़ी से बदलता है ज़माना मिरे दोस्त
कितनी तेज़ी से बदलता है ज़माना मिरे दोस्त
जाने किस काम में मसरूफ़ रहा बरसों तक
याद आया ही नहीं तुझ को भुलाना मिरे दोस्त
पूछना मत कि ये क्या हाल बना रक्खा है
आईना बन के मिरा दिल न दुखाना मिरे दोस्त
इस मुलाक़ात में जो ग़ैर-ज़रूरी हो जाए
याद रहता है किसे हाथ मिलाना मिरे दोस्त
देखना मुझ को मगर मेरी पज़ीराई को
अपनी आँखों में सितारे न सजाना मिरे दोस्त
अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वाली
मैं न कहता था बहुत दूर न जाना मरे दोस्त
हिज्र तक़दीर में लिक्खा था कि मजबूरी थी
छोड़ इस बात से क्या मिलना मिलाना मिरे दोस्त
तू ने एहसान किया अपना बना कर मुझ को
वर्ना मैं क्या था हक़ीक़त न फ़साना मिरे दोस्त
इस कहानी में किसे कौन कहाँ छोड़ गया
याद आ जाए तो मुझ को भी बताना मिरे दोस्त
छोड़ आया हूँ हवाओं की निगहबानी में
वो समुंदर वो जज़ीरा वो ख़ज़ाना मिरे दोस्त
ऐसे रस्तों पे जो आपस में कहीं मिलते हों
क्यूँ न उस मोड़ से हो जाएँ रवाना मिरे दोस्त
इस मुलाक़ात में जो ग़ैर-ज़रूरी हो जाए
याद रहता है किसे हाथ मिलाना मिरे दोस्त
देखना मुझ को मगर मेरी पज़ीराई को
अपनी आँखों में सितारे न सजाना मिरे दोस्त
अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वाली
मैं न कहता था बहुत दूर न जाना मरे दोस्त
हिज्र तक़दीर में लिक्खा था कि मजबूरी थी
छोड़ इस बात से क्या मिलना मिलाना मिरे दोस्त
तू ने एहसान किया अपना बना कर मुझ को
वर्ना मैं क्या था हक़ीक़त न फ़साना मिरे दोस्त
इस कहानी में किसे कौन कहाँ छोड़ गया
याद आ जाए तो मुझ को भी बताना मिरे दोस्त
छोड़ आया हूँ हवाओं की निगहबानी में
वो समुंदर वो जज़ीरा वो ख़ज़ाना मिरे दोस्त
ऐसे रस्तों पे जो आपस में कहीं मिलते हों
क्यूँ न उस मोड़ से हो जाएँ रवाना मिरे दोस्त
2
0 Likes









