Ulfat Shayari
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Ulfat Shayari

    अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा
    ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है

    Bhaskar Shukla
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    मैं इश्क़ कर रहा हूँ मगर सोचता भी हूँ
    पिछले बरस जो हो चुका अबके बरस न हो

    Ashu Mishra
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    कब तुम्हें इश्क़ पे मजबूर किया है हमने
    हम तो बस याद दिलाते हैं चले जाते हैं

    Abbas Tabish
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    होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
    इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है

    Nida Fazli
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    इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब'
    कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

    Mirza Ghalib
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    इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
    दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया

    Mirza Ghalib
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    इश्क़ हो जाए किसी से कोई चारा तो नहीं
    सिर्फ मुस्लिम का मोहम्मद पे इजारा तो नहीं

    Kunwar Mohinder Singh Bedi Sahar
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    ये यक़ीं है की मेरी उल्फ़त का
    होगा उन पर असर कभी न कभी

    Anwar Taban
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    कुछ न मैं समझा जुनून ओ इश्क़ में
    देर नासेह मुझ को समझाता रहा

    Meer Taqi Meer
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    ऐ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा हाँ इश्क़-ए-जुनूँ-पेशा
    आज एक सितमगर को हँस हँस के रुलाना है

    Jigar Moradabadi
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    तर्जुबा था सो दुआ की के नुकसान ना हो
    इश्क मजदूर को मजदूरी के दौरान ना हो

    मै उसे देख ना पाता था परेशानी मे
    सो दुआ करता था मर जाये परेशान ना हो

    Afkar Alvi
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    ख़ुदा ने फ़न दिया हमको कि लड़के इश्क़ लिखेंगे
    ख़ुदा कब जानता था हम, ग़ज़ल में दर्द भर देंगे

    Prashant Sharma Daraz
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    तोहफ़ा, फूल, शिकायत, कुछ तो लेकर जा
    इश्क़ से मिलने ख़ाली हाथ नहीं जाते

    Tanoj Dadhich
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    इश्क़ भी अपनी ही शर्तों पे किया है मैं ने
    ख़ुद को बेचा नहीं बाज़ार में सस्ता करके

    उस से कहना था के वो कितना ज़रूरी है मुझे
    आ रहा हूँ अभी जिस शख़्स से झगड़ा करके

    Khan Janbaz
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    इश्क़ हमारा चाँद सितारे छू लेगा
    घुटनों पर आकर इज़हार किया हमने

    Darpan
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    इश्क़ पहले बना था जाने जाँ
    नींद की गोलियाँ बनीं थीं फिर

    Ashutosh Kumar "Baagi"
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    यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं
    कोई भी हमसे ख़फ़ा है ही नहीं

    इश्क़ ही इश्क़ है महसूस करो
    और कुछ इसके सिवा है ही नहीं

    Madhyam Saxena
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    मैं ज़िंदगी के सभी ग़म भुलाए बैठा हूँ
    तुम्हारे इश्क़ से कितनी मुझे सहूलत है

    Zeeshan Sahil
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    सर्दी और गर्मी के उज़्र नहीं चलते
    मौसम देख के साहब इश्क़ नहीं होता

    Moin Shadab
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    मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है
    ये समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है

    इश्क़ है वादा-फ़रामोश नहीं है कोई
    दिल तलबगार मेरी बात कहाँ सुनता है

    Vishal Singh Tabish
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