Vishal Singh Tabish

Vishal Singh Tabish

@vishalsinghtabish

Vishal Singh Tabish shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Vishal Singh Tabish's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

भूल जाना नहीं रहा ताबिश
वो दीवाना नहीं रहा ताबिश

ज़िंदगी का सुलूक मेरे साथ
दोस्ताना नहीं रहा ताबिश

हम की हंसते हैं क्योंकि रोने को
कोई शाना नहीं रहा ताबिश

Vishal Singh Tabish

अब उससे दोस्ती है जिससे कल मुहब्बत थी
अब इससे ज़्यादा बुरा वक़्त कुछ नहीं है दोस्त

Vishal Singh Tabish
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मशवरा हम भी तो दे सकते थे
पर तेरा साथ दे रहे थे हम

Vishal Singh Tabish
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मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है
ये समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है

इश्क़ है वादा-फ़रामोश नहीं है कोई
दिल तलबगार मेरी बात कहाँ सुनता है

Vishal Singh Tabish
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ख़मोशी तो यही बतला रही है
उदासी रास मुझको आ रही है

मुझे जिन ग़लतियों से सीखना था
वही फिर ज़िंदगी दोहरा रही है

Vishal Singh Tabish
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ये ज़माना ये दौर कुछ भी नहीं
बस मोहब्बत है और कुछ भी नहीं

Vishal Singh Tabish
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सब की हिम्मत नहीं ज़माने में
लोग डरते हैं मुस्कुराने में

एक लम्हा भी ख़र्च होता नहीं
मेरी ख़ुशियों को आने जाने में

Vishal Singh Tabish
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इस दुनिया के कहने पर उम्मीद न रक्खो
पत्थर रख लो सीने पर उम्मीद न रक्खो

Vishal Singh Tabish
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मन में एक इरादा होता है ताबिश
राजा पहले प्यादा होता है ताबिश

मानता हूँ मजबूरियाँ थीं कुछ दिक्कत थी
पर वादा तो वादा होता है ताबिश

Vishal Singh Tabish
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कहानी में तुम्हारे ज़िक्र भर से
मेरा किरदार हल्का हो रहा है

Vishal Singh Tabish
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वैसे वो इक फूल है मुझको भाता है
पर ग़ुस्से में पत्थर का हो जाता है

Vishal Singh Tabish
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मुझसे हर शख़्स रूठ जाता है
मेरा होना भी मसअला है इक

Vishal Singh Tabish
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तन्हाई ये तंज करे है तन्हा क्यों है
यार कहाँ है आगे पीछे चलने वाले

Vishal Singh Tabish
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दोस्त मेरा ये मानना है एक
एक हम-सब हैं और ख़ुदा है एक

मुझसे हर शख़्स रुठ जाता है
मेरा होना भी मसअला है एक

Vishal Singh Tabish
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डर है घर में कैसे बोला जाएगा
छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा

मैं बस उसका चेहरा पढ़कर जाऊँगा
मेरा पेपर सबसे अच्छा जाएगा

Vishal Singh Tabish
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हमने सोचा है इसके बारे में,
कुछ मुनाफ़ा है इस खसारे में

मैं तो ख्वाबों से तर्क करता था,
कुछ न कुछ बात है तुम्हारे में

Vishal Singh Tabish
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एक अजब सानेहा गुज़रा है मेरे माज़ी में
मेरी दिलचस्पी खत्म हो गई है शादी में

Vishal Singh Tabish
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मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है,
यह समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है

इश्क़ है वादा फ़रामोश नहीं है कोई,
दिल तलबग़ार मेरी बात कहाँ सुनता है

Vishal Singh Tabish
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तुम पर इक दिन मरते मरते मर जाना है,
दीवाने को कहाँ ख़बर है घर जाना है

एक शब्द तुमको अंधेरे का खौफ़ दिलाकर,
बाद में खुद भी जान बूझकर डर जाना है

Vishal Singh Tabish
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तेरे ख्वाब सँवर जाएँ तो बेहतर होगा
अपना क्या है मर जाएँ तो बेहतर होगा

Vishal Singh Tabish
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