मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है
    ये समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है

    इश्क़ है वादा-फ़रामोश नहीं है कोई
    दिल तलबगार मेरी बात कहाँ सुनता है

    Vishal Singh Tabish
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    ख़मोशी तो यही बतला रही है
    उदासी रास मुझको आ रही है

    मुझे जिन ग़लतियों से सीखना था
    वही फिर ज़िंदगी दोहरा रही है

    Vishal Singh Tabish
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    इस दुनिया के कहने पर उम्मीद न रक्खो
    पत्थर रख लो सीने पर उम्मीद न रक्खो

    Vishal Singh Tabish
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    कहानी में तुम्हारे ज़िक्र भर से
    मेरा किरदार हल्का हो रहा है

    Vishal Singh Tabish
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    मुझसे हर शख़्स रूठ जाता है
    मेरा होना भी मसअला है इक

    Vishal Singh Tabish
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    डर है घर में कैसे बोला जाएगा
    छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा

    मैं बस उसका चेहरा पढ़कर जाऊँगा
    मेरा पेपर सबसे अच्छा जाएगा

    Vishal Singh Tabish
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    ख़ुशबू के एहसास पे भागे पागल लोग
    मेरे जैसे सीधे साधे पागल लोग

    मेरे जैसा ढूँढ़ रहे हो सब्र करो
    मिल जाएँगे मेरे जैसे पागल लोग

    दोस्त हमारे कोशिश करके हार गए
    पागल को कितना समझाते पागल लोग

    Vishal Singh Tabish
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    डर है घर में कैसे बोला जाएगा
    छोड़ो जो भी होगा देखा जाएगा

    नम्बर लिखकर हाथों में पकड़ा देना
    तेरे घर इक छोटा बच्चा जाएगा

    मैं बस उसका चेहरा पढ़कर जाऊँगा
    मेरा पेपर सबसे अच्छा जाएगा

    Vishal Singh Tabish
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    मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है,
    यह समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है

    इश्क़ है वादा फ़रामोश नहीं है कोई,
    दिल तलबग़ार मेरी बात कहाँ सुनता है

    Vishal Singh Tabish
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    तुम पर इक दिन मरते मरते मर जाना है,
    दीवाने को कहाँ ख़बर है घर जाना है

    एक शब्द तुमको अंधेरे का खौफ़ दिलाकर,
    बाद में खुद भी जान बूझकर डर जाना है

    Vishal Singh Tabish
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