Mirza Ghalib

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@mirza-ghalib

Mirza Ghalib shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mirza Ghalib's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

सब कहाँ कुछ लाला-ओ-गुल में नुमायाँ हो गईं
ख़ाक में क्या सूरतें होंगी कि पिन्हाँ हो गईं

Mirza Ghalib

बेदाद-ए-इश्क़ से नहीं डरता मगर 'असद'
जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा

Mirza Ghalib

की मेरे क़त्ल के बाद उस ने जफ़ा से तौबा
हाए उस ज़ूद-पशीमाँ का पशीमाँ होना

Mirza Ghalib

रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो
हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो

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ग़म अगरचे जाँ-गुसिल है प कहाँ बचें कि दिल है
ग़म-ए-इश्क़ गर न होता ग़म-ए-रोज़गार होता

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आए है बेकसी-ए-इश्क़ पे रोना 'ग़ालिब'
किस के घर जाएगा सैलाब-ए-बला मेरे बा'द

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अपनी गली में मुझको न कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल
मेरे पते से ख़ल्क़ को क्यूँ तेरा घर मिले

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या रब वो न समझे हैं न समझेंगे मिरी बात
दे और दिल उनको जो न दे मुझको ज़बाँ और

Mirza Ghalib
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बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल
कहते हैं जिसको इश्क़ ख़लल है दिमाग़ का

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न सताइश की तमन्ना न सिले की परवा
गर नहीं हैं मिरे अशआर में मअ'नी न सही

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तेशे बग़ैर मर न सका कोहकन 'असद'
सरगश्ता-ए-ख़ुमार-ए-रुसूम-ओ-क़ुयूद था

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मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ
काश पूछो कि मुद्दआ क्या है

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धौल-धप्पा उस सरापा नाज़ का शेवा नहीं
हम ही कर बैठे थे ‘ग़ालिब’ पेश-दस्ती एक दिन

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गो मैं रहा रहीन-ए-सितम-हा-ए-रोज़गार
लेकिन तिरे ख़याल से ग़ाफ़िल नहीं रहा

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वो फ़िराक़ और वो विसाल कहाँ
वो शब-ओ-रोज़-ओ-माह-ओ-साल कहाँ

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ग़ुरूर-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी नश्शा-ए-बे-बाकी-ए-मस्ताँ
नम-ए-दामान-ए-इस्याँ है तरावत मौज-ए-कौसर की

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नश्शा-हा शादाब-ए-रंग-ओ-साज़-हा मस्त-ए-तरब
शीशा-ए-मय सर्व-ए-सब्ज़-ए-जू-ए-बार-ए-नग़्मा है

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फिर उसी बेवफ़ा पे मरते हैं
फिर वही ज़िंदगी हमारी है

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दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है

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बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब'
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं

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