Haalaat Shayari
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Haalaat Shayari

    मैं ख़ुद ये चाहता हूँ कि हालात हों खराब
    मेरे ख़िलाफ़ ज़हर उगलता फिरे कोई

    ऐ शख़्स अब तो मुझ को सब कुछ क़ुबूल है
    ये भी क़ुबूल है कि तुझे छीन ले कोई

    Jaun Elia
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    अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा
    ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है

    Bhaskar Shukla
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    अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें
    दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमे तो बात करें

    Faiz Ahmad Faiz
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    हमसे फिर प्यार का इज़हार किया है तुमने
    ये तमाशा तो कई बार किया है तुमने

    Anjum Rehbar
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    परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के
    वफ़ा करने की नौबत आ गई है

    Fahmi Badayuni
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    मैं ने पूछा था कि इज़हार नहीं हो सकता
    दिल पुकारा कि ख़बर-दार नहीं हो सकता

    Abbas Tabish
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    तन्हाई हो, हिज्र हो, बातें करने को तरसे ये दिल,
    इश्क़ हुआ वो जिसमें ये हालात मुसलसल रहते हों

    Hasan Raqim
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    उसको चाहा और चाहत पर क़ायम हैं
    पर अफ़सोस के हम इज़हार नहीं कर सकते

    Shadab Asghar
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    शबाब अब बस करो तुम भी, तुम अब क्या कर के मानोगे
    ग़ज़ल के ज़रिए तुम भी यार क्या हालात कहते हो

    Shabab Shahzad Khan
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    सोचकर अब शर्म आती है ज़रा
    चूम लेना होंठ को इज़हार में

    Neeraj Neer
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    बैठा हूँ अभी सामने और सोच रहा हूँ
    इज़हार पे मेरे भला क्या मेरा बनेगा

    Afzal Ali Afzal
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    आज फिर इज़हार करते हैं सनम
    आपसे ही प्यार करते हैं सनम

    आपको क्या इश्क़ से परहेज़ है
    आप क्यों इनकार करते हैं सनम

    Divy Kamaldhwaj
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    ज़िस्त की जान जाते भी देखा हूंँ मैं
    मौत को साँस आते भी देखा हूंँ मैं

    सब तो हँसते ही हैं मेरे हालात पे
    दर्द को मुस्कुराते भी देखा हूंँ मैं

    SHIV SAFAR
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    बदले मौसम हालात यहाँ
    है ख़ुशियों की बारात यहाँ

    होली खेलेंगे हम भी पर
    खेलेंगे तेरे साथ यहाँ

    Kaviraj " Madhukar"
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    अपने इश्क़ का यूँ इज़हार करना है तुझसे
    तुझको हाथों से पहनाएँगें कानों में झुमके

    Harsh saxena
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    उसे अपना कहा बस आजमाइश ही नहीं माँगी
    ख़ुदा माँगा तो पर उसकी नवाज़िश ही नहीं माँगी

    महीने भर से प्यासा छटपटाता मर गया था मैं
    वो बादल आए तो थे मैंने बारिश ही नहीं माँगी

    Ashkrit Tiwari
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    कीजे इज़हार-ए-मोहब्बत चाहे जो अंजाम हो
    ज़िंदगी में ज़िंदगी जैसा कोई तो काम हो

    Priyamvada ilhan
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    इज़हार पे भारी है ख़मोशी का तकल्लुम
    हर्फ़ों की ज़बाँ और है आँखों की ज़बाँ और

    Haneef akhgar
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    मुझ से नफ़रत है अगर उस को तो इज़हार करे
    कब मैं कहता हूँ मुझे प्यार ही करता जाए

    Iftikhar Naseem
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    हालात ये है मुल्क के
    झूठ अब तो सच पे भारी है

    Rizwan Khoja "Kalp"
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