Harsh saxena

Harsh saxena

@harsh_badshah_saxena

Harsh saxena shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Harsh saxena's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

38

Content

119

Likes

1339

Shayari
Audios
  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

हथेली पर तू मेरा नाम लिख ले
मुझे मेहंदी की रंगत देखनी है

Harsh saxena

बदन उतार के खूँटी पे टाँग आया हूँ
तुम्हारा फ़र्ज़ है मुझको गले लगाने का

Harsh saxena
10 Likes

तेरी मेहंदी की रंगत मुझको ये खुल कर बताती है
कि हाथों पर तेरे लिक्खा हुआ प्यारा लगूँगा मैं

Harsh saxena

चाँदनी रात में तारों पे ग़ज़ल कहना है
आज फिर चाँद की आँखों पे ग़ज़ल कहना है

इतना आसाँ नहीं उसके लिए कुछ भी कहना
यूँ समझ लीजिए ख़्वाबों पे ग़ज़ल कहना है

Harsh saxena
12 Likes

पाना या खोना तो उसे क़िस्मत की बात थी
हमको तो दिल लगाने का हक़ भी न मिल सका

Harsh saxena
19 Likes

यक़ीनन उस ने फिर दुनिया में कुछ प्यारा नहीं देखा
तुम्हारे कान का जिस ने अभी झुमका नहीं देखा

Harsh saxena
31 Likes

उसके लबों को चूम के ये इल्म हो गया
मुझको वो ज़हर के बिना भी मार सकती है

Harsh saxena
51 Likes

कोई तो पूछे मोहब्बत के इन फ़रिश्तों से
वफ़ा का शौक़ ये बिस्तर पे क्यों उतर आया

Harsh saxena
60 Likes

मयख़ाने की क़द्र है मेरी नज़रों में
इसने जाने कितनी मौतें टाली हैं

Harsh saxena
61 Likes

फ़रेब दे गया इस सादगी से वो मुझको
कि जुर्म सारा ही मजबूरियों के सर आया

Harsh saxena
46 Likes

अपने बदन की तुम भी हिफ़ाज़त न कर सके
हम ने भी ख़ूब ग़ैर के चूल्हे से आग ली

Harsh saxena
37 Likes

भले ही सैकड़ों मजबूरियाँ हों बेवफ़ाई की
मगर तुम वज्ह मत बनना किसी सूनी कलाई की

Harsh saxena
53 Likes

हम ने क़ुबूल कर लिया अपना हर एक जुर्म
अब आप भी तो अपनी अना छोड़ दीजिए

Harsh saxena
58 Likes

पड़ गया महँगा तेरी फोटो हटाना
पर्स का हर नोट जाली हो गया है

Harsh saxena
37 Likes

उम्र से मेरी फ़नकारी को मत आँको
उस्तादों से बेहतर ग़ज़लें कहता हूँ

Harsh saxena
42 Likes

दिल तुम्हारा भी किसी से लगे तो तुम जानो
किस तरह हँसते हुए ज़हर पिया जाता है

Harsh saxena
44 Likes

चाहे तो कोशिश कर लो दावा है भूल न पाओगी
जब भी ज़िक्र-ए-वफ़ा होगा तुम मेरे शे'र सुनाओगी

Harsh saxena

कुछ इस सलीक़े से माथे पे उसने होंट रखे
बदन को छोड़ के सारी थकन को चूम लिया

Harsh saxena

इसी ख़्वाब में ज़ाया किया 'ईद को हर दम
कभी बोले वो सीने से लगकर मुबारक हो

Harsh saxena

हम क्या जानें जन्नत कैसी होती है
उससे पूछो जिसने तुमको पाया है

Harsh saxena
10 Likes

LOAD MORE