वो जिस की याद ने जीना मुहाल कर रखा है
उसी की आस ने मुझ को सँभाल कर रखा है
उसी की आस ने मुझ को सँभाल कर रखा है
सियाह रातों में साए से बातें करता है
तुम्हारे ग़म ने नया रोग पाल कर रखा है
9
9 Likes
8
18 Likes
फ़ुर्सत नहीं मुझे कि करूँ इश्क़ फिर से अब
माज़ी की चोटों से अभी उभरा नहीं हूँ मैं
माज़ी की चोटों से अभी उभरा नहीं हूँ मैं
डर है कहीं ये ऐब उसे रुस्वा कर न दे
सो ग़म में भी शराब को छूता नहीं हूँ मैं
6
10 Likes
3
5 Likes
हम चाह कर भी टूटते हैं हर दफ़ा
होता यही है इश्क़ का क्या क़ायदा
होता यही है इश्क़ का क्या क़ायदा
हर वक़्त तुम यूँ याद आते हो मुझे
जैसे नई दुल्हन करे मिस मायका
2
6 Likes
ज़ख़्म दिल के भरे नहीं अब तक
और इक दर्द फिर हरा कर लूँ
और इक दर्द फिर हरा कर लूँ
अब भरोसा नहीं किसी का पर
तू कहे तो यक़ीं तिरा कर लूँ
1
15 Likes









