SHIV SAFAR

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@ShivSafar

SHIV SAFAR shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in SHIV SAFAR's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

अब मुझे हक़ तो नहीं पर इतना बोलूँगा ज़रूर
जा रहे तो लौट आओ जा चुके तो अलविदा

SHIV SAFAR

साथ इक दूजे के हम होते जनाब
पास फिर इतने न ग़म होते जनाब

मुझसे ही होती समंदर में नमी
दुख जो रो लेने से कम होते जनाब

SHIV SAFAR

सोचा था कि इस साल तो मिल जाएगी राहत
अफ़सोस कि इस साल भी जीना ही पड़ेगा

SHIV SAFAR

तुझे हासिल तो कर सकता हूँ लेकिन
मुहब्बत करने में ज़्यादा मज़ा है

SHIV SAFAR

जब ख़ुदा हो जाए क़ातिल-यार तो सज्दे की ख़ातिर
ख़ून से अपने वुज़ू करना कहाँ से कुफ़्र होगा

SHIV SAFAR

लिबास जैसे मुसाफ़िर बदलता रहता है
किसी सफ़र पे कभी एतिबार मत करना

SHIV SAFAR

दिल से उसकी तस्वीर हटाऊँ भी कैसे
ख़ाली कमरे की वहशत से मैं वाक़िफ़ हूँ

SHIV SAFAR

घर वालों के कहने पे तर्क-ए-शायरी करूॅं
यानी पहले जान अपनी लूॅं तब नौकरी करूॅं

SHIV SAFAR

हर किसी में नज़र मुझको तू आ रही
सबको अब चाहना मेरी मजबूरी है

SHIV SAFAR

कहें गर दोस्त उसको दोस्ती जिसने निभाई हो
तो मेरे ग़म तुझे इस फ्रेंडशिप डे की बधाई हो

SHIV SAFAR

वो अब मेरा नहीं ये मानना आसाँ यूँ हो जाए
बराबर एक्स के कुछ मान लेना जितना आसाँ था

SHIV SAFAR

मेरी साँसें ये नहीं अब जैसे कोई आह हुई
तेरी याद आई मेरी ज़िंदगी तबाह हुई

SHIV SAFAR

ख़ुशियाँ तो क्या ही देंगी मसर्रात के सिवा
ग़म से मिलो वो देगा तजर्बे नए नए

SHIV SAFAR

जिसको लतीफ़ा जान के हॅंसती है रोज़ वो
मेरी ग़ज़ल का सबसे जिगर-चाक शेर है

SHIV SAFAR

क्या थी ज़रूरत पूरी कहानी कहने की
इश्क़ ही कह देते तो भी मैं रो देता

SHIV SAFAR

शख़्स अगर कोई होता तो कब का ठुकरा देता मैं
लेकिन मेरा दिल ही मेरे दिल को रोज़ दुखाता है

SHIV SAFAR

कौन कहता है कि लिखने के लिए पढ़ते हैं सब
पढ़ते हैं ताकि लिखा है जो लिखा जाए न फिर

SHIV SAFAR

मुझको कुछ और दिन है मरना अभी
मैं अभी और जीने वाला हूॅं

SHIV SAFAR

तेरे पीछे नहीं आता क़जा़एँ खींच लाती हैं
लकीरें हाथ की मेरी तेरी सूरत बनाती हैं

पता अब जानना तेरा नहीं मुश्किल मेरे ख़ातिर
गली, क़स्बा, मकाँ तेरा हवाएँ सब बताती हैं

SHIV SAFAR

आती है मुझको अब जब कभी याद वो
रात मेरी अँधेरों में खो जाती है

फिर सुलाने में ख़ुद मुझको थक हार के
नींद मेरे सिरहाने पे सो जाती है

SHIV SAFAR

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