क्या थी ज़रूरत पूरी कहानी कहने की
इश्क़ ही कह देते तो भी मैं रो देता
इश्क़ ही कह देते तो भी मैं रो देता
10
2 Likes
8
0 Likes
7
3 Likes
5
3 Likes
4
7 Likes
जब रोजी रोटी कपड़ा और मकान गया
क्या इश्क़ की फ़ितरत होती है मैं जान गया
क्या इश्क़ की फ़ितरत होती है मैं जान गया
मैं सत्य अहिंसा के रस्ते पर निकला था
पहले तो आँखें फिर ज़बान फिर कान गया
बाक़ी क़ब्रों की मुझ से शिक़ायत जाएज़ थी
मरने के बा'द भी देर से क्यूँ शमशान गया
उस झुमके वाली का जब मैं ने नाम सुना
ख़ुद ग्राहक कैसे बिकते हैं ये जान गया
बस बीस रुपए थी क़ीमत उस के झुमके की
बिकते हैं आशिक़ सस्ते में मैं मान गया
3
0 Likes
2
5 Likes
तो क्या ये हो नहीं सकता कि तुझ से दूर हो जाऊँ
मैं तुझ को भूलने के वासते मजबूर हो जाऊँ
Read Fullमैं तुझ को भूलने के वासते मजबूर हो जाऊँ
1
4 Likes









