शाह से छुपके क़ैदी ने शहज़ादी को पैगाम लिखा

जंग से भागने वालों में शहज़ादे का भी नाम लिखा

दूरदराज़ से आने वाले ख़त मेरी हम सेाही के थे
इक दिन उस ने हिम्मत कर के अपना असली नाम लिखा

हम दोनों ने अपने अपने दीन पे क़ाएम रहना था
घर की इक दीवार पे अल्लाह इक दीवार पे राम लिखा

एक मोहब्बत ख़त्म हुई तो दूसरी की तैयारी की
नई कहानी के आगाज में पहली का अंजाम लिखा

— Zia Mazkoor

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Mazhab Shayari

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