Zia Mazkoor

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@ziya-mazkoor

Zia Mazkoor shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Zia Mazkoor's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

आपका काम हो गया साहब
लाश दरिया में फेंक दी मैंने

Zia Mazkoor
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कोई कहता नहीं था लौट आओ
कि हम पैसे ही इतने भेजते थे

तुम्हारा शुक्रिया ऐ डूबती नाव
कि हम भी तैरना भूले हुए थे

Zia Mazkoor
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इस वक़्त मुझे जितनी ज़रूरत है तुम्हारी 
लड़ते भी रहोगे तो मोहब्बत है तुम्हारी

Zia Mazkoor
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उसने
तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उसने

मैं इसलिए भी उसे ख़ुदकुशी से रोकता हूँ
लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उसने

Zia Mazkoor
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मैं उन्हीं आबादियों में जी रहा होता कहीं
तुम अगर हँसते नहीं उस दिन मेरी तक़दीर पर

Zia Mazkoor
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ये उसकी मोहब्बत है कि रुकता है तेरे पास
वरना तेरी दौलत के सिवा क्या है तेरे पास

Zia Mazkoor
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क्या तुम तब भी ऐसे ही चुपचाप तमाशा देखोगे
इस मुश्किल में फँसने वाली अगर तुम्हारी बेटी हो

Zia Mazkoor
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हवा चली तो उसकी शॉल मेरी छत पे आ गिरी
ये उस बदन के साथ मेरा पहला राब्ता हुआ

Zia Mazkoor
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चारागर ऐ चारागर चिल्लाती थी
ज़ख़्मों को भी हाथ नहीं लगवाती थी

पता नहीं कैसा माहौल था उसके घर
बुर्का पहन के शर्टें लेने आती थी

Zia Mazkoor
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तुम ने भी उन से ही मिलना होता है
जिन लोगों से मेरा झगड़ा होता है

तुम मेरी दुनिया में बिल्कुल ऐसे हो
ताश में जैसे हुकुम का इक्का होता है

Zia Mazkoor
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एक नज़र देखते तो जाओ मुझे
कब कहा है गले लगाओ मुझे

तुमको नुस्खा भी लिख के दे दूंगा
ज़ख्म तो ठीक से दिखाओ मुझे

Zia Mazkoor
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यहाँ से जाने की जल्दी किसको है तुम बताओ
ये सूटकेसों में कपड़े किसने रखे हुए हैं

करा तो लूँगा इलाक़ा ख़ाली मैं लड़-झगड़ कर
मगर जो उसने दिलों पे क़ब्ज़े किए हुए हैं

Zia Mazkoor
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ऐसे तेवर दुश्मन ही के होते हैं
पता करो ये लड़की किस की बेटी है

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हम को नीचे उतार लेंगे लोग
इश्क़ लटका रहेगा पंखे से

Zia Mazkoor
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वक़्त ही कम था फ़ैसले के लिए
वर्ना मैं आता मशवरे के लिए

तुम को अच्छे लगे तो तुम रख लो
फूल तोड़े थे बेचने के लिए

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जगह जगह न तअल्लुक़ ख़राब कर मेरा
तेरे लिए तो किसी से भी लड़ पड़ूँगा मैं

Zia Mazkoor
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त
कुछ तो है जो इन के बाद भी हासिल करना बाक़ी है

कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं
फिर कहता हूॅं पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है

Zia Mazkoor
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वक़्त ही कम था फ़ैसले के लिए
वर्ना मैं आता मशवरे के लिए

Zia Mazkoor
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