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बह रही है फिर वही पुरवा सुहानी रात में
चल पड़ी है स्वप्न की फिर राजधानी रात में
चल पड़ी है स्वप्न की फिर राजधानी रात में
लौट आया है मेरा बचपन दुबारा फिर वही
फिर सुनाएँगी मुझे दादी कहानी रात में
फिर लुटेगा दिल किसी का देखना आकाश में
बढ़ रही है चाँद की फिर नित जवानी रात में
फिर सितारों की कोई बारात निकलेगी यहाँ
फिर उतर आएँगी परियाँ आसमानी रात में
फिर चमकने लग गए जुगनू मेरे अतराफ़ में
फिर से मिलने आ गई पागल दिवानी रात में
फिर कमल खिलने लगे हैं गाँव के तालाब में
फिर महकने लग गई है रात रानी रात में
छोटी मोटी बात पर लड़ना झगड़ना रोज़ ही
दिन की सारी दुश्मनी फिर भूल जानी रात में
फिर शरारत बढ़ गई हैं सारे बच्चों की बहुत
फिर डराने आएगी भूतों की नानी रात में
जब पिशाचों का मिलन होता है काली रात में
तब लहू बन जाता है दरिया का पानी रात में
और सुनना है अगर 'उपदेश' आना गाँव में
फिर सुनाएँगे कभी बाक़ी कहानी रात में
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सब कहते हैं तुम से दूरी रखने को
दिल कहता है और बढ़ा ले नज़दीकी
दिल कहता है और बढ़ा ले नज़दीकी
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बड़े आरोप हैं इस पर कि खा जाती है तन्हाई
कभी सनकी कभी पागल बना जाती है तन्हाई
कभी सनकी कभी पागल बना जाती है तन्हाई
मगर पहलू बदल कर के जो देखोगे तो पाओगे
कभी अरहत कभी बुद्धा बना जाती है तन्हाई
जो क़स
में रोज़ खाता हो हमेशा साथ जीने की
वही दिल तोड़ जाए तो रुला जाती है तन्हाई
बड़े ही स्वार्थी हैं सब बदलते हैं ज़रूरत पर
ये दुनिया के हक़ीक़त को बता जाती है तन्हाई
इरादा था मेरा जब ये कि कुछ बन के ही लौटूँगा
कभी थक हार कर बैठा चिढ़ा जाती है तन्हाई
भले कोसो इसे जितना भले ही गालियाँ दो तुम
मगर इंसान को ख़ुद से मिला जाती है तन्हाई
कहीं जो ढूँढ़ने पर भी नहीं मिलता किताबों में
वो जीवन का अहम दर्शन दिखा जाती है तन्हाई
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तमाम आँसू अगर शब्दों में ढल जाते तो अच्छा था
तेरी यादों से हम बाहर निकल जाते तो अच्छा था
तेरी यादों से हम बाहर निकल जाते तो अच्छा था
इसी इक आस में हम ने कई नदियाँ बहा डालीं
ए पत्थर दिल कहीं तुम भी पिघल जाते तो अच्छा था
अदावत के कई शो'ले भड़कते थे मगर दिल फिर
यही कहता किसी के तुम महल जाते तो अच्छा था
खिलौना तो नहीं है वो जो उस को फिर से ला दूँगा
ए मेरे दिल कहीं तुम भी बहल जाते तो अच्छा था
सर-ए-महफ़िल बता कर यूँॅूँ हुए रुस्वा हमीं तो हैं
कि सारे राज़ दिल के हम निगल जाते तो अच्छा था
पुरानी बात को ले कर, जो पछताओ! तो क्या हासिल
अगर तुम वक़्त रहते ही सँभल जाते तो अच्छा था
ज़माने और थे उन के मोहब्बत और थी उन की
जो मेहमानों से कहते थे कि कल जाते तो अच्छा था
ज़माने को बदलने की हर इक नाकाम कोशिश से
कहीं बेहतर था हम ख़ुद ही बदल जाते तो अच्छा था
सजी है बज़्म उल्फ़त की अगर 'उपदेश' ऐसे में
सभी बे-मौसमी बादल भी टल जाते तो अच्छा था
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