आज भी हम सोचते हैं
कल के वो ग़म सोचते हैं
कल के वो ग़म सोचते हैं
तुम नहीं गर सोचते तो
तुम को क्यूँ हम सोचते हैं
हम ने सोचा आप हरदम
हम को हमदम सोचते हैं
हम ने सोचा तुम को हमदम
और हरदम सोचते हैं
चीख़ती है आँख तुम को
हम तो मुबहम सोचते हैं
आप भी सोचो हमारा
आप का हम सोचते हैं
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सफ़र घर है ठिकाना है
हमें घर जो बनाना है
हमें घर जो बनाना है
सभी को है हँसाना भी
सभी का ग़म उठाना है
गया बचपन किताबों में
जवानी में कमाना है
बहन भी है हमें जिस को
पढ़ाना है सिखाना है
हाँ बाबा और अम्मा को
हमें हज भी कराना है
हूँ बेटा और होने का
फ़राइज़ है निभाना है
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काश ऐसी भी कोई सूरत हो
ख़्वाब है जो मिरा हक़ीक़त हो
ख़्वाब है जो मिरा हक़ीक़त हो
सोचता हूँ तो दिल धड़कता है
तुम मिरी साँस की सहूलत हो
तुम ही को देख कर गुज़ारी है
ज़िंदगी ऐसी जिस से वहशत हो
ख़ुश्की लब पर नहीं तिरे जँचती
चूम लूँ मैं अगर इजाज़त हो
हम नहीं जौन पर न जाने क्यूँ
तुम मिरी आख़िरी मोहब्बत हो
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कभी सच तो कभी धोका रहा है
हमेशा दिल को ये ख़तरा रहा है
हमेशा दिल को ये ख़तरा रहा है
अजब है ना के जिस ने साथ छोड़ा
निभाए कोई तो यादआ रहा है
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