9
0 Likes
एक ग़ज़ल फिर कहना चाहूँ तेरे-मेरे प्यार के नाम
आधा तेरी जीत का क़िस्सा आधा मेरी हार के नाम
आधा तेरी जीत का क़िस्सा आधा मेरी हार के नाम
इश्क़ मुहब्बत के अफ़साने,रांझा ,मजनूँ या फ़रहाद
सब गुल बूटे ख़ुशबू वाले लेकिन हैं तलवार के नाम
Read Fullसब गुल बूटे ख़ुशबू वाले लेकिन हैं तलवार के नाम
8
0 Likes
7
0 Likes
6
0 Likes
तू कि रौशन दिए की महक की तरह,सर्द रातों के दिल में
लहकता हुआ
लहकता हुआ
मैं कि सूरज का टुकड़ा मगर बुझ गया, शाम के दर पे आख़िर सिसकता हुआ
5
0 Likes
3
0 Likes
2
0 Likes
सब को अपना इश्क़ बताना रोना-धोना चिल्लाना
जो जी चाहे कर सकता है वो अपनी नादानी में
जो जी चाहे कर सकता है वो अपनी नादानी में
अश्कों की अपनी बोली है ख़ामोशी की कहन जुदा
कुछ तस्वीरें आख़िर आग लगा देती हैं पानी में
1
0 Likes










