बात ऐसी है नहीं वो बात ही करता नहीं
जब हमें होती ज़रूरत बस तभी करता नहीं
बाप बच्चों के लिए जादूगरी करता नहीं
बस मुसलसल काम करने में कमी करता नहीं
किस क़दर उसको सताया है ख़ुदा ने इश्क़ में
जो नहीं काफ़िर है फिर भी बंदगी करता नहीं
सोचता हूँ हिज्र कैसे काटता होगा 'तनोज'
शेर जो कहता नहीं और मैक़शी करता नहीं
तुम जितना तो कोई मुझको ख़ास नहीं
लेकिन फिर भी क्यों तुमको विश्वास नहीं
मुझसे बेहतर लड़का तो मिल जाएगा
लेकिन मेरी माँ से बेहतर सास नहीं
मुझसे वादा करने वाले वादा करके भूल गए
अच्छा ख़ासा पीतल था मैं सोना करके भूल गए
एक तरफ़ है पूरी दुनिया एक तरफ़ है मेरा घर
लेकिन तुमको बतला दूँ मैं दुनिया से है अच्छा घर
सब कमरों की दीवारों पर तस्वीरें हैं बस तेरी
मुझसे ज़ियादा तो लगता है जानेमन ये तेरा घर