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Ananya Rai Parashar

Top 10 of Ananya Rai Parashar

Ananya Rai Parashar

Top 10 of Ananya Rai Parashar

    ग़ौर से देख हर गली को यहाँ
    सब से कुछ बैर है सभी को यहाँ

    हर क़दम इक नए अंधेरे से
    लड़ना पड़ता है रौशनी को यहाँ

    सिर्फ़ काँटे हुए किसी का नसीब
    और गुलशन मिला किसी को यहाँ

    हर घड़ी मौत मौत कर के सब
    रौंद देते हैं ज़िंदगी को यहाँ

    अपनी आवाज़ में ही गुम हैं सभी
    कौन सुनता है ख़ामोशी को यहाँ

    दिल में कुछ है ज़बान पर कुछ है
    कैसे पहचानें आदमी को यहाँ

    भूल कुछ हो गई अनन्या से
    सच समझ बैठी दिल-लगी को यहाँ
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    Ananya Rai Parashar
    10
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    ये जो हम तेरी राह देखते हैं
    ख़ुद के मिटने की चाह देखते हैं
    Ananya Rai Parashar
    9
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    दिल किसी से भी अगर लगता है
    फिर तो दीवार से सर लगता है

    एक बस तुम को ही चाहूँ लेकिन
    मुझ को इस इश्क़ से डर लगता है

    तेरी यादों से सजाती हूँ जब
    मुस्कुराता हुआ घर लगता है

    हम सेफ़र तू जो नहीं है मेरा
    रूठा रूठा सा सफ़र लगता है

    मीठे मीठे से ख़याल आते हैं
    तेरी बातों का असर लगता है

    अब नहीं है वो 'अनन्या' तेरा
    सच नहीं है ये मगर लगता है
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    Ananya Rai Parashar
    8
    1 Like
    "ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है"
    ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है
    दिल के तारो को छेड़ा है और दुखों का तोड़ लिखा है
    जीवन में जो कुछ होता है गुणा घटाना जोड़ लिखा है
    हँसी ठिठोली और आँसू है फिर दर्दों का सार लिखा है
    नाम तुम्हारा हर पन्ने पर जाने कितनी बार लिखा है
    हम ने अपनी हार लिखी है और तुम्हारी जीत लिखा है
    ये ना पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है
    तुलसी की पाती पर मैं ने दिल के सब मनुहार लिखा है
    प्यार हमारा अमर रहे ये क्या क्या है स्वीकार लिखा है
    इन अधरों से उन अधरों का जो भी है संवाद लिखा है
    अपने दिल के इन भावों का एक सरल अनुवाद लिखा है
    ये रिश्ता है अपना कितना पावन और पुनीत लिखा है
    ये न पूछो कैसे जा कर मैं ने कोई गीत लिखा है
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    Ananya Rai Parashar
    7
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    तुम मुझे इतना आम मत समझो
    हर किसी के लिए नहीं हूँ मैं
    Ananya Rai Parashar
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    क्यूँ परेशां हों किसी बात से हम
    कुछ ना रहता है हमेशा के लिए
    Ananya Rai Parashar
    5
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    उस ने जब भी कभी मोहब्बत की
    जैसे मुझ पे कोई इनायत की

    डूब जाते हैं अहल-ए-दिल इस
    में
    मैं वही झील हूँ मोहब्बत की

    फिर मेरे रू-ब-रू वो आया है
    फिर ख़बर हो गई क़यामत की

    होंठ पर होंठ रख दिए मैं ने
    क्या ज़रूरत है अब इजाज़त की

    जब तेरा लम्स हो गया हासिल
    किस को परवाह कोई जन्नत की

    ऐसे मंज़िल नहीं मिली मुझ को
    मैं ने पाने को ख़ूब मेहनत की

    ग़मज़दों ने सजाई थी महफ़िल
    और मैं ने वहाँ निज़ामत की

    आज़माओ ना तुम 'अनन्या' को
    हद होती है इक शराफ़त की
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    Ananya Rai Parashar
    4
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    इल्म इतना तो मुझे हासिल है
    बे-सबब कोई बहस अच्छी नहीं
    Ananya Rai Parashar
    3
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    बताओ बताओ कहाँ जा रहे हो
    न हम को सताओ कहाँ जा रहे हो

    ज़रा देर ठहरो करो बात मुझ से
    नज़र मत चुराओ कहाँ जा रहे हो

    जो रक्खा है तुम ने मेरी रहगुज़र पर
    वो पत्थर हटाओ कहाँ जा रहे हो

    बड़े दिन पे मिलना हुआ है हमारा
    तबीयत सुनाओ कहाँ जा रहे हो

    यहाँ हम सफ़र से ज़रूरी है क़ुरबत
    ये दूरी मिटाओ कहाँ जा रहे हो

    ऐ साक़ी कभी तो वो जाम-ए-इनायत
    हमें भी पिलाओ कहाँ जा रहे हो
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    Ananya Rai Parashar
    2
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    पीपल वाली छाँव रखी है ख़ुश्बू बिखरी मिट्टी में
    पूरा-पूरा गाँव धरा है मेरी माँ की चिट्ठी में
    Ananya Rai Parashar
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