बड़ी हसरत हमारी थी मगर दिल हार कर बैठे
    बचाया हद से ज़्यादा पर उसे हम प्यार कर बैठे

    रहे ख़ामोश कुछ दिन तक मगर कहना ज़रूरी था
    मिली इक रोज़ हमको और हम इज़हार कर बैठे

    Afzal Sultanpuri
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    पीठ पीछे से वार करते हैं
    और बातें हज़ार करते हैं

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    क्या हुआ कुछ बोलिए क्यों लग रहे बेज़ार से
    छोड़िए गुस्सा सनम जी बोलिए अब प्यार से

    Afzal Sultanpuri
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    मुनाफ़िक और मुशरिक में कहीं अफ़ज़ल नहीं कोई
    यहांँ तो शहर हैं लेकिन इधर जंगल नहीं कोई

    Afzal Sultanpuri
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    आख़िरत का तुम्हें कहांँ डर है
    कह दिया कब्र ने तिरा घर है

    Afzal Sultanpuri
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    चाल चलना उसे नहीं आता
    हाथ मलना मुझे नहीं आता

    Afzal Sultanpuri
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    जिधर देखा उधर नज़र आया
    यार मेरा किधर नज़र आया

    Afzal Sultanpuri
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    मिलने आना तो ऐसे आना तुम
    जब भी आना तो फिर ना जाना तुम

    Afzal Sultanpuri
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    दर दर की ठोकर खाई हमने
    तब जाकर हम तेरे दर पहुँचे

    Afzal Sultanpuri
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    दिल चोरी का काम ग़लत है
    'अफ़ज़ल' तेरा नाम ग़लत है

    इश्क़, मोहब्बत तुम रहने दो
    इसका तो अंजाम ग़लत है

    Afzal Sultanpuri
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