बताओ बताओ कहाँ जा रहे हो
न हम को सताओ कहाँ जा रहे हो
ज़रा देर ठहरो करो बात मुझ से
नज़र मत चुराओ कहाँ जा रहे हो
जो रक्खा है तुम ने मेरी रहगुज़र पर
वो पत्थर हटाओ कहाँ जा रहे हो
बड़े दिन पे मिलना हुआ है हमारा
तबीयत सुनाओ कहाँ जा रहे हो
यहाँ हम सफ़र से ज़रूरी है क़ुरबत
ये दूरी मिटाओ कहाँ जा रहे हो
ऐ साक़ी कभी तो वो जाम-ए-इनायत
हमें भी पिलाओ कहाँ जा रहे हो
— Ananya Rai Parashar















